गोरखपुर : डा.प्रदीप तिवारी ने अमेरिका के लेहाई विश्वविद्यालय से 2008 में केमिकल इंजीनिय¨रग में शोध किया। करीब 72 लाख रुपये सालाना पैकेज पर जर्मन कंपनी बेयर में बतौर इंजीनियर नौकरी शुरू की, लेकिन मातृभूमि की याद सताने लगी। पिता भी चाहते थे कि बेटा गांव से जुड़ा रहे। दो साल नौकरी करने के बाद प्रदीप विदेश से लौट आए। मुंबई के बाद देवरिया में विद्यालय खोलकर लोगों से जुड़े। पिछले साल बिहार बार्डर पर गुठनी में दूध का कारोबार शुरू किया। प्रत्येक दिन करीब पांच हजार किसानों से सीधे 11 हजार लीटर दूध खरीदते हैं। इसमें 50 फीसद देवरिया जनपद व 50 फीसद बिहार के सिवान जनपद के पशुपालक हैं। इससे न केवल किसानों की आमदनी बढ़ी है, बल्कि पशुपालन की तरफ उनका रुझान बढ़ रहा है। अबतक करीब एक दर्जन किसानों ने पशुपालन की तरफ कदम बढ़ाया है। वहीं दूध की आपूर्ति करने वाले किसान अपने पशुओं को अच्छा आहार दे रहे हैं। इसके लिए डा. प्रदीप उन्हें प्रोत्साहित करते रहते हैं। उनका लक्ष्य है प्रतिदिन एक लाख लीटर दूध खरीदने की। प्रतिभा के धनी डा.प्रदीप उद्यमी बनकर सफलता की कहानी गढ़ रहे हैं।

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ह्यूस्टन शहर में दो साल तक की नौकरी

देवरिया जिला मुख्यालय के सीसी रोड निवासी डा.प्रदीप ने 1997 में हाईस्कूल व 1999 में इंटर की परीक्षा महाराष्ट्र राज्य शिक्षा बोर्ड डि¨स्टक्शन के साथ उत्तीर्ण की। मुंबई विश्वविद्यालय महाराष्ट्र से 2003 में केमिकल इंजीनिय¨रग में बीई प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। 2007 में अमेरिका के लेहाई विश्वविद्यालय से एमएस व 2008 में यहीं से पीएचडी की उपाधि ग्रहण की। उनके कई शोध पत्र अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए। पढ़ाई पूरी करने के बाद विश्व की प्रमुख दवा एवं केमिकल कंपनी बेयर में टेक्नालाजी स्पेशलिस्ट के पद पर अमेरिका के ह्यूस्टन शहर में दो साल तक नौकरी की। इसके बाद भारत वापसी कर कई विद्यालयों, बीएड व बीटीसी महाविद्यालयों, डिग्री कालेजों व एक तकनीकी संस्थान का संचालन का कार्य कर रहे हैं। वर्ष 2017 में जनपद के बार्डर पर सिवान जनपद के गुठनी में समृद्ध किसान स्वस्थ देश के उद्देश्य को लेकर अमिश डेयरी एवं फूड्स प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना की। सिवान व देवरिया जनपद के करीब पांच हजार किसानों से सीधे दूध खरीदते हैं। किसानों को उचित मूल्य प्राप्त हो रहा है और उन्हें अतिरिक्त आय स्त्रोत उपलब्ध हुआ है। दूध और उससे दही, घी, पनीर, पेड़ा आदि तैयार किया जा रहा है। कारोबार से जुड़े करीब पांच दर्जन लोगों को सीधे रोजगार मिला है।

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माता-पिता की प्रेरणा से अमेरिका से लौटकर शुरू किया कारोबार

डा.प्रदीप कहते हैं कि अमेरिका में कई विश्वस्तरीय कंपनियों व एक विजि¨टग रिसर्च स्कालर के रूप में बेलजियम देश में कार्य करने का अनुभव प्राप्त हुआ। उच्चतम कारपोरेट संस्कृति व विभिन्न देशों की संस्कृति को निकटता से जाना, लेकिन मेरा अपने देश व माटी के प्रति अगाध लगाव है। इसकी प्रेरणा पिता युगुलकिशोर नाथ तिवारी व माता असरफा तिवारी से मिली। माता-पिता मुंबई में रहने के बावजूद अपने जन्मभूमि को नहीं भूले। पिता ने शैक्षणिक न्यास की स्थापना कर महाराष्ट्र, उप्र व बिहार में कई विद्यालयों व महाविद्यालयों की स्थापना कर माटी से जुड़े हैं।

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पशुपालन की तरफ बढ़ रहा रूझान: मदन

लार के खेमादेई गांव निवासी किसान मदन ¨सह कहते हैं कि एक साल पहले उनके पास दो दुधारू गायें थीं। जब गुठनी में डेयरी शुरू हुआ तो वहां दूध आपूर्ति करने लगे। मुनाफा देखकर एक और दुधारू गाय खरीद ली। उनके जैसे कई किसानों ने दुधारू पशुओं की खरीदारी की है। अप्रैल में भूसा उपलब्ध होने पर इलाके में पशुओं की संख्या में न केवल इजाफा होगा, बल्कि दूध के उत्पादन में भी वृद्धि होगी। उनके गांव के अलावा ¨पडी, नदौली, बिरनी, सजांव, बरडीहा समेत कई गांवों के लोग यहां दूध आपूर्ति करते हैं।

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By Jagran