गोरखपुर : ईपीएफ (कर्मचारी भविष्य निधि) अपने सदस्यों के घर के सपने को पूरा करेगा। जमीन या मकान पर लिए लोन की किश्त कर्मचारी के ईपीएफ अंशदान से जमा की जाएगी। अगर एकमुश्त रकम की जरूरत पड़ी तो कर्मचारी के ईपीएफ खाते में जमा धनराशि का 90 फीसद कर्मचारी को प्रदान किया जाएगा। बैंक से लोन लेने में भी कर्मचारी को भटकना नहीं होगा, सिर्फ ईपीएफ कार्यालय द्वारा जारी एक सर्टिफिकेट पर बैंक से लोन आसानी से मिल जाएगा।

ईपीएफ सदस्यों को अब अपने घर के सपने को पूरा करने के लिए इधर-उधर भटकने की जरूरत नहीं है। कर्मचारी फ्लैट या घर खरीद सकते हैं अथवा जमीन लेकर घर बनवा सकते हैं। इसके लिए कम से कम दस सदस्यों को मिलकर एक हाउसिंग सोसाइटी बनानी होगी। इसके बाद पूरी सोसाइटी या कोई एक सदस्य भी अपने घर के लिए ईपीएफ कार्यालय में आवेदन कर सकता है। सभी दस या अधिक सदस्य एक साथ घर लेना चाहते हैं तो उन्हें किसी बिल्डर से टाइअप करना होगा, यदि कोई एक व्यक्ति कहीं जमीन लेकर अपना घर बनवाना चाहता है तो जितनी राशि नकद देनी है वह ईपीएफ खाते से ईपीएफ कार्यालय दे देगा, शेष धनराशि जो बैंक से लोन ली जाएगी, उसकी मासिक किश्त कर्मचारी के ईपीएफ खाते में हर माह जाने वाले ईपीएफ अंशदान से दी जाएगी।

इस योजना का लाभ लेने के लिए जरूरी है कि कर्मचारी की ईपीएफ सदस्यता कम से कम तीन साल की हो और उसके ईपीएफ खाते में कम से कम 20 हजार रुपये बैलेंस हो। यदि पति-पत्‍‌नी दोनों ईपीएफ के सदस्य हैं तो दोनों का मिलाकर 20 हजार का बैलेंस होना चाहिए। इस योजना के साथ प्रधानमंत्री आवास योजना का भी लाभ मिल सकता है। दो कंपनियों खासकर सुगर मिलों के कर्मचारी इस योजना के तहत संपर्क में हैं। अभी कुछ फाइनल नहीं हो पाया है। यह बहुत अच्छी योजना है, यदि सदस्य ने आवेदन किया है तो ईपीएफ कार्यालय पूरी कोशिश करता है कि सदस्य का अपना घर हो जाए।

- मनीष मणि, सहायक भविष्य निधि आयुक्त

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