गोरखपुर, जेएनएन : अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में महायोगी गुरु गोरक्षनाथ योग संस्थान और गोरखनाथ मंदिर की ओर से आयोजित आनलाइन साप्ताहिक योग शिविर और शैक्षिक कार्यशाला में 'नाथ पंथ की योग परंपरा' विषय पर आनलाइन व्याख्यानमाला का आयोजन हुआ। बतौर मुख्य वक्ता संस्कृत एवं विद्या अध्यययन संस्थान जेएनयू दिल्ली के संकाय प्रमुख प्रो. संतोष कुमार शुक्ल ने कहा कि योग विद्या सृष्टि के प्रारंभ से विद्यमान है। भगवान श्रीकृष्ण से लेकर महर्षि पतंजलि ने इसे शास्त्र परंपरा में लाने का कार्य किया जबकि जन-जन तक पहुंचाने का श्रेय गुुरु गोरक्षनाथ और नाथ पंथ को जाता है।

नाथ पंथ में योग की विस्तृत परंपरा

प्रो. संतोष कुमार शुक्ल ने कहा कि नाथ पंथ में योग की विस्तृत परंपरा रही है। इस पंथ ने समाज को भोग से योग और योग मुक्ति का मार्ग बताने का कार्य किया है। गुरु गोरक्षनाथ ने यम और नियम को स्वीकार किया है, लेकिन उसे योग का अंग नहीं माना है बल्कि मनुष्य की जीवन पद्धति का अंग बताया है। उन्होंने कहा है कि आसन से सभी प्रकार के रोग नष्ट होते हैं।

आसन के होते हैं 84 प्रकार

आसन के 84 प्रकार होते हैं, इनमें दो प्रमुख हैं- सिद्धासन और पद्मासन। आसन के बाद प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान व समाधि का विस्तृत विवेचन करते हुए उन्होंने कहा कि योग के इन छह अंगों के अनुष्ठान से ही मोक्षरूपी परम पुरुषार्थ की प्राप्ति होती है।

योग भूमि है गोरखपुर

प्रो. शुक्ल ने गोरखपुर को योग भूमि बताया। कहा कि यहां से संपूर्ण संसार के कल्याण के लिए योग का संदेश दिया जाता है। अन्य दिन की तरह चौथे दिन भी सुबह व शाम छह से सात बजे लोगों को आनलाइन योगाभ्यास कराया गया।

योग से संबंध‍ित कला प्रतियोगिता आयोजित

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में पूर्वोत्तर रेलवे में विविध कार्यक्रम शुरू हो गए हैं। रेलवे बालिका इंटर कालेज में योग से संबंधित कला प्रतियोगिता आयोजित की गई। इसमें विद्यालय की छात्राओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और उनकी प्रतिभा झलकी। रितु एश्वर्या ने प्रथम, कोमल साहनी ने द्वितीय और कोनिका ने तृतीय स्थान हासिल किया। मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पंकज कुमार सिंह के अनुसार 20 जून तक रोजाना सुबह सात से आठ बजे तक जूम एप पर आनलाइन योग प्रशिक्षण कार्यक्रम भी चलेगा। योग गुरु नेहा पटेल रेलकर्मियों व उनके स्वजन को योग का अभ्यास करा रही हैं।

Edited By: Rahul Srivastava