गोरखपुर, जीतेन्द्र पाण्डेय। ठंड शुरू होते ही गोरखपुर व उसके इर्द-गिर्द के जिलों में विदेशी पक्षियों का आना-जाना शुरू हो गया है। नेपाल सीमा पर स्थित जिले कभी परिंदों की पहली पसंद हुआ करते थे। बढ़ते शिकार के चलते उन्होंने अपना ठिकाना बदल दिया था। सीमाई जिलों में इनकी उपस्थित कम हो गई थी, पर बार्डर पर एसएसबी की तैनाती के बाद लगातार पक्षियों की संख्या में वृद्धि हो रही है।

रामगढ़ताल के पास देखी जा रही ब्लैक विंड स्टिल्ट की मौजूदगी

गोरखपुर जिले के रामगढ़ताल पर ब्लैक विंड स्टिल्ट नामक विदेशी पक्षी पिछले कई दिनों से देखा जा रहा है। डीएफओ अविनाश कुमार कहना है कि गोरखपुर जिले का रामगढ़ताल, सरुआताल, महराजगंज जिले का परगापुरताल, दार्जनिया, सिमरहना, संतकबीरनगर जिले का बखिरा, सिद्धार्थनगर का मर्थी, मझौली, सिसवा, परिगवां सागर(कृत्रिम जलाशय) आदि ताल पक्षियों के लिए ही जाने जाते हैं। सप्ताह भर पूर्व मझौली जलाशय के पास एशियन स्पून बिल पक्षी देखा गया है। आम तौर पर विदेशी पक्षी यहां 30 नवंबर के बाद दिखते हैं। ठंड बढऩे के साथ विदेशी पक्षियों का यहां आना शुरू हो गया है। हिमालय के करीब होने से सीमाई जिलों की आबोहवा सदैव पक्षियों के अनुकूल रही है।

सारसों की बढ़ रही संख्या

महराजगंज जिले में सारसों की संख्या एक वर्ष में 561 से 761 हो गई। सिद्धार्थनगर में वर्तमान में 550 से अधिक सारस हैं। दो वर्ष पूर्व तक इनकी संख्या 500 से कम थी। पक्षियों की संख्या बढऩे का पहला कारण बेहतर जलवायु व दूसरा एसएसबी की तैनाती से शिकार में कमी है।

जानिए कौन-कौन से पक्षी दिखते हैं

डीएफओ सिद्धार्थनगर आकाशदीप बधावन का कहना है कि इस क्षेत्र में पक्षियों की संख्या बढ़ी है। ठंड के दिनों में यहां ब्लैक हेडेड आइबिस, ब्लैक नेक स्टार्क, ओरिंयंटल डार्टर, एशियन स्पून बिल जैसे विदेशी पक्षी देखे जाते हैं। इनका आना शुरू भी हो गया है।

एसएसबी की मौजूदगी सुखद

महराजगंज के डीएफओ के पुष्प कुमार का कहना कि पक्षियों को लेकर वन विभाग की टीम भी एक्टिव रहती है। एसएसबी की मौजूदगी सुखद है। इससे पक्षियों को बड़े पैमाने पर संरक्षण मिला है। जलाशयों में मछली आदि डालकर ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा है।

Posted By: Pradeep Srivastava

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