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    सिस्टम पर सवाल: रेलवे में तत्काल का भी अकाल, 40 प्रतिशत टिकट दलालों के हाथ

    Updated: Sat, 29 Nov 2025 07:58 AM (IST)

    गोरखपुर में तत्काल टिकटों की भारी कमी हो गई है। 24 घंटे पहले बुक होने वाले टिकट भी मुश्किल से मिल रहे हैं। लगभग 40% तत्काल टिकट दलालों के हाथ में जा रहे हैं, जिससे यात्रियों को परेशानी हो रही है। रेलवे के सिस्टम में सेंधमारी के कारण दलाल तेजी से टिकट बुक कर रहे हैं। ओटीपी व्यवस्था लागू न होने से कालाबाजारी बढ़ रही है।

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    आरक्षण कार्यालय पर 20 घंटे पहले लाइन लगाने के बाद भी नहीं मिल रहा कन्फर्म टिकट। जागरण

    जागरण संवाददाता, गोरखपुर। ट्रेन छूटने के 24 घंटे पहले बुक होने वाला तत्काल टिकट का भी अकाल पड़ गया है। आरक्षण काउंटर पर 20 घंटे पहले लाइन लगाने के बाद भी कन्फर्म टिकट नहीं मिल रहा। रेलवे के काउंटरों से किसी तरह सिर्फ एक कन्फर्म टिकट निकल रहा है। दूसरा टिकट ही वेटिंग हो जा रहा।

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    शेष टिकट दलाल पलक झपकते (एक मिनट के अंदर) बुक कर ले रहे। ट्रेनों का लगभग 40 प्रतिशत टिकट तत्काल के रूप में दलालों के हाथ चला जा रहा। जनरल कोटे के 50 प्रतिशत आरक्षित टिकट 60 दिन पहले टिकटों की बुकिंग शुरू होते ही बुक हो जा रहे। बाकी दिनों में यात्री वेटिंग टिकट के लिए जूझ रहे। अंत में नो रूम (वेटिंग टिकट की बुकिंग भी बंद) हो जा रहा है।

    सुबह दस बजे तत्काल टिकट के लिए एक दिन पहले शाम चार बजे से ही आरक्षा कार्यालय पर लाइन लगनी शुरू हो जा रही। दूर-दराज गांवों से लोग आते जाते हैं और सूची में नाम दर्ज करते जाते हैं। कुछ आरक्षण कार्यालय के सामने ही ठहर जाते हैं। कार्यालय के सामने मच्छरदानी लगाकर सो जाते हैं।

    कई स्टेशन परिसर में रात भर जगते हैं। एक दिन पहले गुरुवार को गोरखपुर आरक्षण काउंटर पर यात्री तत्काल टिकट के लाइन में लगने वाली सूची में नाम दर्ज कराने के लिए आपस में भिड़ गए। अब तो यह रोज की कहानी हो गई है। रात भर जागने और 20 घंटे के इंतजार के बाद भी हाथ में वेटिंग टिकट ही आ रहा है।

    जानकारों का कहना है कि अब तो यह वर्ष पर्यंत की कहानी हो गई है। त्योहारों के बाद विशेषकर छठ बाद स्थिति और खराब हो जाती है। दिल्ली, पंजाब, महाराष्ट्र और गुजरात जाने वाले यात्रियों की मुश्किलें और बढ़ जाती हैं। परेशानी फिर बढ़ गई हैं। दिल्ली, पंजाब, महाराष्ट्र और गुजरात आदि जाने वाली ट्रेनों में किसी भी श्रेणी का कन्फर्म टिकट नहीं मिल रहा। लोग तत्काल टिकट की तरफ भाग रहे हैं, लेकिन वहां भी निराशा ही हाथ लग रही है।

    रेलवे के सिस्टम में दलालों की सेंधमारी
    सेंटर फार रेलवे इंफार्मेशन सिस्टम (क्रिस) की टिकटिंग व्यवस्था पूरी तरह धड़ाम हो गई है। टिकटों के अवैध कारोबारी व्यवस्था में पूरी तरह सेंध लगा चुके हैं। उनके साफ्टवेयर रेलवे के सिस्टम से तेज गति से कार्य कर रहे हैं। रेलवे काउंटरों पर बैठे रेलकर्मी जहां एक मिनट में एक कन्फर्म टिकट बुक कर रहे हैं, वहीं दूर दराज शहरों, कस्बों और गांवों में बैठे कारोबारी छह से 12 कन्फर्म टिकट बुक कर ले रहे हैं।

    इसमें टिकट बुक करने वाले प्राइवेट और इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कारपोरेशन (आइआरसीटीसी) के एजेंट भी शामिल हैं। यद्यपि, रेलवे बोर्ड के दिशा-निर्देश पर जुलाई से ही तत्काल टिकटों की कालाबाजारी रोकने के लिए नई ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) व्यवस्था लागू होनी थी। लेकिन, आज तक नई व्यवस्था लागू नहीं हो पाई।

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    शहर, कस्बा और गांवों में बैठे तत्काल टिकटों के अवैध कारोबारी विभिन्न लागिन से एक बार में ही दर्जनों तत्काल कन्फर्म टिकट बुक कर ले रहे हैं। कन्फर्म टिकट के नाम पर बदले में लोगों से मुंहमांगा किराया वसूल रहे हैं। काउंटर पर कन्फर्म टिकट का इंतजार कर रहे लोग हाथ मलते रह जा रहे हैं। जानकारों का कहना है कि रेलवे को तो पूरा किराया मिल जा रहा, लेकिन आम यात्री परेशान हो रहे हैं। तत्काल कोटा के टिकटों की बुकिंग ट्रेन छूटने के 24 घंटे पहले सुबह दस बजे से शुरू होती है।