गोरखपुर, जेएनएन। लगता है कि महराजगंज जनपद स्थित गड़ौरा चीनी मिल इस साल भी नहीं चलेगी। बकाया भुगतान न होना इसकी वजह है। किसानों को चिंता है कि कहीं सैकड़ों एकड़ खेत में गन्ने की फसल पिछले साल की तरह इस बार भी बर्बाद न हो जाए। घुघली, फरेंदा के बाद गड़ौरा चीनी मिल की बंदी ने किसानों की कमर तोड़ दी है। इसे चलाने को लेकर कोई निर्णय न होने से किसान परेशान हैं।

उन्हें पिछले साल का वाकया याद आ रहा है। तब गड़ौरा मिल बंद होने पर प्रशासन ने सिसवा व हाटा मिल पर गन्ना गिराने की व्यवस्था बनाई थी, लेकिन मिल के तय समय बाद गन्ना लेने से मना करने से गन्ना खेत में ही बेकार हो गया था। ग्राम बजहा उर्फ अहिरौली के किसान सिंहासन कुशवाहा व रामवृक्ष यादव ने बताया कि गड़ौरा मिल पर सत्र 2014-15 का उनका बकाया अभी तक नहीं मिला है। मन्नू यादव व मिश्रौलिया के अशोक पाडेय ने कहा कि बच्चों की पढ़ाई से लेकर दवा, शादी व अन्य खर्चे पूरे नहीं हो रहे। सत्र 2014-15 के 15 करोड़ रुपये व 2017-18 के 21 करोड़ का भुगतान अभी भी अधर में है।

फैक्ट फाइल गणेश शुगर मिल आनंदनगर

सेठ आनंदराम जयपुरिया ने 1932 में इसकी स्थापना की। केंद्र सरकार ने 1988 में अधिग्रहित कर राष्ट्रीय वस्त्र निगम के अधीन कर दिया। 1994 तक पेराई के बाद 1999 में मिल बंद हो गई। घुघली चीनी मिल : लाला केशर लाल नारंग ने 1920 में स्थापना की। 31 अक्टूबर 1999 को यह बंद हो गई। 52 एकड़ क्षेत्रफल में फैली मिल 2012 में मिल 3.75 करोड़ में बिक गई।

गड़ौरा चीनी मिल

वर्ष 1998 में स्थापना के बाद वर्ष 2000 में पहली बार पेराई हुई। वर्ष 2018-19 में 36 करोड़ के बकाए में मिल बंद हो गई। विभाग ने मिल को 59.25 लाख क्विंटल गन्ना आवंटित किया था। पेराई सत्र बुआई 2019-20 19000 हेक्टेयर 2018-19 18000 हेक्टेयर 2017-18 16350 हेक्टेयर 2016-17 14120 हेक्टेयर बकाया भुगतान के लिए मिल प्रबंधन पर दबाव बनाया जा रहा है।

पाच करोड़ रुपये खाते में आए हैं, जिसका भुगतान एक हफ्ते में हो जाएगा। किसानों को गन्ना पेराई में समस्या नहीं आने दी जाएगी। - जगदीश चंद यादव, जिला गन्ना अधिकारी, महराजगंज

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