गोरखपुर, जागरण संवाददाता। देवरिया जिले में पराली जलाए जाने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। जिसका नतीजा यह है कि पर्यावरण का स्तर लगातार खराब होता जा रहा है। सांस के रोगियों की मुश्किल बढ़ रही है। हाल यह है कि सभी तहसीलों में तैनात किए गए लेखपालों की निष्क्रियता के चलते कुछ किसान धड़ल्ले से अपने खेतों में पराली जला रहे हैं। फील्ड स्टाफ व राजस्व लेखपाल, बीट पुलिस अधिकारियों पर इसका कोई असर नहीं है। जिसका असर यह है कि सुबह से लेकर रात तक आसमान में धुआं होने से लोगों की परेशानी बढ़ रही है।

गौरी बाजार इलाके में धडल्‍ले से जलाई जा रही पराली

देवरिया सदर तहसील के गौरी बाजार इलाके में पराली जलाने की घटना दो सप्ताह से चरम पर है। गौरी बाजार के निकट पथरहट, भगुआ,सिरजग में पराली खेतों में चलाई जा रही है। यहां न तो कोई रोकने वाला है और न ही किसानों को कोई जागरूक करने वाला। जिसका खामियाजा लोग भुगत रहे हैं।

बरहज तहसील क्षेत्र में भी है बुरा हाल

यही हाल बरहज तहसील की भी है। भलुअनी के आगे सड़क से सटे गांवों में किसान अपने खेतों में पराली जला रहे हैं। सड़क से हर रोज अफसरों का आना जाना होता है लेकिन किसी ने पराली जलाने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। जिसका असर यह है कि किसान मनमाने तरीके से पराली जला रहे हैं।

चिकित्सक की राय

जिला अस्पताल के आयुष विंग के चिकित्साधिकारी डा. अखिलेश त्रिपाठी कहते हैं कि पराली जलाने से खास तौर पर दमा व श्वास व त्वचा की बीमारी बढ़ती है। इसके साथ ही वायुमंडल प्रदूषित होता है। किसानों को इस पर चिंतन मनन करना चाहिए।

कृषि विशेषज्ञ बोले

कृषि विशेषज्ञ डा. एचएस गोविंदराव का मानना है कि पराली जलाने से वायुमंडल तो प्रदूषित होता ही है। भूमि के कृषि मित्र कीट नष्ट हो जाते हैं। जिससे भूमि की उर्वरा शक्ति खत्म हो जाती है। पराली जलाना खेती किसानी के लिए बहुत ही दुष्परिणाम देने वाला है। किसानों को पराली नहीं जलाने चाहिए बल्कि पराली को खेत की जोताई करते समय मिट्टी में दबा देना चाहिए। पराली जलाना खेत के लिए नुकसानदायक है। इसका असर उत्पादन पर पड़ सकता है।

Edited By: Navneet Prakash Tripathi