कुशीनगर : गांवों में सफाई व्यवस्था की असलियत छिपाने वाले वाले अधिकारियों-कर्मचारियों पर शिकंजा कसेगा। सरकार एसएसजी (स्वच्छता सर्वेक्षण ग्रामीण) एप के जरिये गांवों में सफाई की हकीकत परखेगी। गांव के लोग मोबाइल में इस एप को डाउनलोड कर अपना फीडबैक दे सकते हैं। ग्रामीणों की राय के आधार पर ही ग्राम पंचायतों को अंक दिए जाएंगे। इससे लोगों को अपनी बात शासन तक पहुंचाने का मौका भी मिलेगा।

ग्रामीण व नगरीय इलाकों में स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए सरकार स्वच्छ भारत मिशन अभियान चला रही है। इस पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं। ग्राम पंचायतों में लाखों रुपये भेजे जाते हैं, लेकिन इसका कोई सकारात्मक असर नहीं दिख रहा। गांवों में नियमित सफाई नहीं हो रही। कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था भी नहीं है। ग्रामीण इलाकों में खुले में शौच पर रोक नहीं लग पा रही है। ऐसे में केंद्र सरकार ने अभियान की हकीकत परखने के लिए स्वच्छ सर्वेक्षण कराने का निर्णय लिया है। इसके लिए शासन से एजेंसी नियुक्त की गई है। इस मुहिम में आमजन को सहभागी बनाया जाएगा। जिन ग्राम पंचायतों का प्रदर्शन बेहतर होगा, उनके लिए चिता की कोई बात नहीं, लेकिन जहां स्थिति खराब होगी, उनकी जवाबदेही तय की जाएगी। अधिकारियों-कर्मचारियों व ग्राम प्रधानों पर कार्रवाई हो सकती है।

जिला ओडीएफ घोषित, फिर भी नहीं खत्म हो रही गंदगी

कुशीनगर जिला दो साल पहले ही ओडीएफ (खुले में शौच मुक्त) घोषित हो चुका है। शौचालय निर्माण का लक्ष्य पूरा होने के बाद ओडीएफ घोषित कर दिया गया। हालांकि, हकीकत इससे अलग है। गांवों में खुले में शौच की परंपरा समाप्त नहीं हो रही। चहुंओर गंदगी का बोलबाला है। प्रशासन के ओडीएफ के दावे की पोल खुल रही है।

सीडीओ अनुज मलिक ने कहा कि केंद्र सरकार के निर्देश पर स्वच्छता सर्वेक्षण किया जा रहा है। लोग मोबाइल पर एप्लीकेशन डाउनलोड कर अपना फीडबैक दे सकते हैं। इससे हकीकत का पता चलेगी।

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