गोरखपुर (जेएनएन)। बीमार साथी बंदी की मौत के बाद गोरखपुर जिला जेल में बंदी बेकाबू हो गए हैं। उन्होंने जिला जेल को अपने कब्जे में ले लिया है। पुलिस फोर्स की जेल के अंदर जाने से कतरा रहा है।

गोरखपुर जेल में बंदियों ने आज सुबह जमकर बवाल किया। उन्होंने जेल के अंदर कई दिन से हो रही जांच के दौरान आगे बढकर तलाशी लेने वाले बंदी रक्षकों को पहले गालियां दी और जब उन्होंने विरोध किया तो पकड़कर पीटने लगे। इस घटना में कई बंदियों एवं बंदी रक्षकों को चोट आई हैं, जिनमें बंदी रक्षक राजेंद्र की हाालत गंभीर है।

देखें तस्वीरें : बंदियों के कब्जे में गोरखपुर जिला जेल, तनाव बढ़ा

गोरखपुर जेल में प्रशासन के निर्देश पर पिछले एक माह से सख्ती की जा रही है। बीच-बीच में प्रशासन की ओर से भी छापेमारी की गई। पिछले कई दिन के अंदर जेलर डा. आर के श्रीवास्तव ने सख्ती से बंदियों की जांच कराई तो उनके पास से 130 मोबाइल फोन मिले। इसके अलावा बाहर से मंगाया गया खाने-पीनेे के सामान भी मिला।

जेल प्रशासल की इस सख्ती को लेकर बंदियों में कई दिन से नाराजगी थी। इस बीच पहले से बीमार बंदी सूर्यभान की आज तड़के मौत हो गई।

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इसकी सूचना जब दूसरे बंदियों को मिली तो उन्होंने जेल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए नारेबाजी शुरू कर दी। बंदी रक्षकों ने जब उन्हें रोकने की कोशिश की तो वे हमले पर उतारू हो गए। उन्होंने तीन बंदी रक्षकों को पकड़कर बंदी बना लिया और जमकर उनकी पिटाई की। तीनों के सिर और चेहरे पर गंभीर चोटें लगी हैं। खून से लथपत तीन बंदी रक्षकों को बडी मुश्किल से छुडाया गया। इलाज के लिए पहले जिला अस्पताल भेजा गया, जहां से राजेंद्र यादव की हालत गंभीर देख डाक्टरों ने मेडिकल कालेज के लिए रेफर कर दिया।

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घटना की सूचना पाकर जिलाधिकारी संध्या तिवारी एवं एसएसपी रामलाल वर्मा के नेतृत्व में पुलिस एवं पीएसी के जवान जेल के अंदर पहुंचे। करीब दो घंटे की मोर्चेबंदी के दौरान बंदियों ने पथराव किया तो जवाब में पुलिस ने वहले आंसू गैस के गोले छोडे और बाद में रबर की गोली चलाई। जिलाधिकारी ने लाउडस्पीकर के जरिये बंदियों से उपद्रव बंद कर बातचीत की अपील की लेकिन उनकी बात सुननेे को तैयार नहीं थे। कई बार बंदियों की ओर से सांसद योगी आदित्य नाथ को बुलाए जाने की मांग की गई। डीएम यह कहते हुए योगी को बुलाने से मना कर दिया कि उन्हें जो भी कहना है उनसे कहें।

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फिलहाल जेल के अंदर से फायरिंग एवं नारेबाजी का शोर बंद हो चुका है, लेकिन अभी भी दो बंदी रक्षकोंं के बंदियों के कब्जे में होने की सूचना है। जिलाधिकारी लाउडस्पीकर के जरिये उनसे बातचीत कर रही हैं। फिलहाल फायरिंग के दौरान अभी तक किसी के मरने की सूचना नहीं है। पहले तीन बंदियों के मारे जाने की अफचवाहें उडी थीं। इनके उग्र तेवर को देखते हुए बंदियों पर आंसू गैस के गोले छोड़े गए हैं। जेल के बाहर रह रह कर गोली चलाए जाने की आवाज गूंज रही है। जेल की विद्युत आपूर्ति को भी बाधित कर दिया गया है। अंदर आगजनी की सूचना पर फायर ब्रिगेड को तैनात किया गया है।

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मोबाइल फोन वापस करने की मांग

गोरखपुर जेल से बाहर आए एक बंदी रक्षक का कहना है कि पिछले कई दिन से जेल में चलाए गए तलाशी अभियान में लगभग 130 से अधिक मोबाइल फाेन बरामद किए गए। बंदी कई दिन से मोबाइल फोन वापस करने की मांग कर रहे थे, जिसे वापस करना संभव नहीं था। इसी बात को लेकर वे नाराज थे। इस बीच एक बंदी सूर्यभान की मौत के बाद बंदियों को हंंगामा करने का बहाना मिल गया। उन्होंने जमकर तोडफोड की, ईंट पत्थर चलाए। जो भी बंदी रक्षक उनके करीब गया उन्होंने पकडकर उसकी पिटाई की। मामला शांत हो गया है और प्रशासन के साथ बातचीत जारी है।

जेलर के निलंबन की मांग

जेल केे अंदर बंदी जेलर के निलंबन की मांग पर अड गए हैं। प्रशासन के सामने उन्होंने निलंबन की शर्त रखीी है। प्रशासन ने जेल में स्थिति सामान्य होने का संदेश बाहर भेजा है, लेकिन बातचीत के दौरान अभी भी कैदियों के चिल्लाने की आवाज बाहर तक आ रही है।

Posted By: Dharmendra Pandey

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