गोरखपुर, जागरण संवाददाता। शहाना की मौत के मामले में नया मोड़ आया है। कमरे में मिले उसके मोबाइल से छेड़छाड़ की गई है। स्क्रीन टूटने की वजह से अंदेशा जताया जा रहा है कि कहीं दारोगा ने ऐसा न कर दिया हो। इसकी इसकी जांच के लिए कोतवाली पुलिस ने मोबाइल को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा है।रिपोर्ट आने के बाद स्थिति साफ हो जाएगी।

15 अक्टूबर की भोर में ही दारोगा को शहाना के मौत की जानकारी हो गई थी। घटना के बाद वह अपना मोबाइल लेकर बच्‍चे के साथ कमरे से बाहर निकला। कुछ लोगों से मोबाइल पर बात करने के बाद पुलिस को सूचना दी। उसके बाद शहाना के घर वालों को बताया। एक घंटा तक वह कमरे में अकेला बैठा रहा। फोरेंसिक टीम के साथ कोतवाली पुलिस पहुंची तो कमरे में शहाना का टूटा हुआ मोबाइल मिला। जिसे पुलिस ने कब्जे में ले लिया। घटना के बाद थाने पहुंचे स्वजन ने सबूत मिटाने के लिए दारोगा पर मोबाइल फोन तोडऩे के साथ ही मैसेज, फोटो और अन्य रिकार्ड मिटाने का आरोप लगाया था। स्थिति स्पष्ट करने के लिए कोतवाली पुलिस ने मोबाइल फोन को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा है।

रिपोर्ट आने के बाद स्थिति होगी साफ

फोरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद स्थिति साफ हो जाएगी कि शहाना के मोबाइल से क्या डिलीट किया गया। घटना से पहले उसने वाट्सएप पर किसी को मैसेज या फोटो तो नहीं भेजा। कोतवाली पुलिस विवेचना में सभी ङ्क्षबदुओं को समाहित करेगी। शहाना और दारोगा राजेंद्र स‍िंह के मोबाइल काल डिटेल को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। घटना से पहले दोनों कि किससे क्या बात हुई पुलिस यह भी जानेगी।

शिशु का डीएनए टेस्ट हो सकता है महत्वपूर्ण सबूत

शहाना के बच्‍चे का डीएनए टेस्ट एक महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकता है। मृतका के स्वजन द्वारा आरोपित दारोगा पर उस बच्‍चे का पिता होने की बात कही जा रही है। वहीं आरोपित दारोगा इससे इंकार कर रहा है। डीएनए जांच रिपोर्ट से मृतका के स्वजन द्वारा लगाए जा रहे आरोपों की जांच में भी मदद मिल सकती है। जांच रिपोर्ट आने से आरोपित के अपराध करने के पीछे के आशय की भी जानकारी होगी। वरिष्ठ अधिवक्ता जेपी स‍िंह का कहना है कि दौरान विवेचना शिशु के पितृत्व निर्धारण से संबंधित साक्ष्य भी संकलित किए जा सकते हैं। इस तरह के मामले में शिशु की डीएनए जांच महत्वपूर्ण निर्णायक सबूत हो सकता है। आत्महत्या के अपराध में अभियुक्त की तीन तरह से भूमिका हो सकती हैं। अभियुक्त मृतका को उकसाकर, अपराध में मदद करके एवं आपराधिक षड्यंत्र करके अपराध घटित करा सकता है। विवेचक द्वारा बच्‍चे और अभियुक्त के रक्त का नमूना लेकर डीएनए जांच कराई जानी चाहिए। इससे जहां आरोप को साबित करने में एक महत्वपूर्ण साक्ष्य मिल सकता है वहीं दूसरी तरफ उस शिशु को जैविक पिता भी मिल जाएगा।

यह है मामला

गोरखपुर के बेलीपार के भीटी गांव निवासी शहाना कोतवाली इलाके में बक्शीपुर में किराए पर कमरा लेकर एलआइयू में तैनात दारोगा राजेंद्र स‍िंह के साथ रहती थी। वह जिला अस्पताल में संविदाकर्मी थी। 15 अक्टूबर की सुबह किराये के कमरे में फंदे से लटकता उसका शव मिला। राजेन्द्र स‍िंह ने मकान मालिक व पुलिस को इसकी सूचना दी। शहाना की मां ने बलिया जिले के रहने वाले दारोगा राजेन्द्र स‍िंह के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का केस दर्ज कराया है।

दारोगा राजेन्द्र स‍िंह निलंबित, शुरू हुई विभागीय जांच

शहाना उर्फ सुहानी स‍िंह को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में जेल गए दारोगा राजेंद्र स‍िंह को निलंबित कर दिया गया। सोमवार को एसएसपी ने मुकदमा दर्ज होने और जेल जाने की रिपोर्ट अभिसूचना मुख्यालय भेजी थी।निलंबित होने के बाद विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है।जांच रिपोर्ट के आधार पर बर्खास्तगी की भी कार्रवाई की जा सकती है। बलिया जिले के रेवती थानाक्षेत्र स्थित श्रीनगर गांव निवासी राजेंद्र स‍िंह गोरखपुर में एलआइयू की विशेष शाखा में तैनात था। 14 जनवरी 2021 से वह कोतवाली क्षेत्र बक्शीपुर में किराए पर कमरा लेकर जिला महिला अस्पताल की संविदाकर्मी शहाना उर्फ सुहानी स‍िंह और 11 माह के बच्‍चे ट्वेटी के साथ रहता था। 15 अक्टूबर को कमरे में शहाना का शव फंदे से लटकता मिलने पर कोतवाली पुलिस ने राजेंद्र स‍िंह को हिरासत में ले लिया। 60 घंटे की माथापच्‍ची के बाद 17 अक्टूबर को कोतवाली पुलिस ने शहाना की मां तहरुन निशा की तहरीर पर आत्महत्या के लिए उकसाने का केस दर्ज कर सोमवार को जेल भेजा था। जिसकी रिपोर्ट एसएसपी ने अभिसूचना मुख्यालय लखनऊ भेजा था।रिपोर्ट के आधार पर मंगलवार को दारोगा राजेन्द्र स‍िंह को निलंबित कर दिया गया।विभागीय जांच के बाद आगे की कार्रवाई होगी।

Edited By: Pradeep Srivastava