गोरखपुर, जेएनएन। इन दिनों पौराणिक धारावाहिकों का दौर चल पड़ा है। पूरा परिवार एक साथ बैठकर सुबह शाम रामायण व महाभारत देख रहा है। दिन प्रतिदिन बच्‍चों की जिज्ञासा बढ़ती जा रही है कि अगले एपिसोड में क्या आएगा। भाषा शैली से इस कदर प्रभावित हो रहे हैं कि कई बार मम्मी के कुछ काम कहने पर हाथ जोड़कर कहते हैं, जो आज्ञा माते। बच्‍चे भगवान राम व कृष्ण का रूप धारण करने की जिद करते हैं तो माता पिता भी शौक से उन्हें सजा रहे हैं।

कृष्ण का माखन खाना मोहता है मन

रामायण दुबारा शुरू हो रहा है। ये बात जानकर पापा बहुत खुश हुए। उन्होंने बताया कि जब वह 12 वर्ष के थे, तब पहली बार इसका प्रसारण शुरू हुआ था। उस समय सड़कों पर बिल्कुल कफ्र्यू जैसा सन्नाटा छा जाता था। अब मैं 12 वर्ष का हूं तो इसका फिर से प्रसारण हो रहा है। इतना सब जानकर मेरी उत्सुकता बढ़ गई है। पहले एपिसोड से देख रहा हूं। रामायण के साथ हम महाभारत भी बहुत उत्साह से देख रहे हैं। बाल कृष्ण का चोरी से माखन खाना मन मोह लेता है। उन दिनों की राजसी वेशभूषा देखने में बहुत अ'छी लगती है। मैनें मां से जिद की कि मुझे भी ऐसा ही सजा दो। इस पर मां ने मुझे कृष्ण और छोटे भाई सात्विक को राम के रूप में सजाया। - शाश्वत सिंह, राप्तीनगर

हर एपिसोड के साथ बढ़ती जा रही रुचि

मैं होली के बाद छुट्टियों में अपनी ननिहाल आया हुआ था कि अचानक लॉकडाउन की घोषणा हो गई। रोज रात को नानी भगवान राम की कहानी सुनाती थीं। तभी रामायण धारावाहिक शुरू हुआ। नानी ने कहा कि तुम जरूर देखो। हर एपिसोड के साथ मेरी रुचि बढ़ती जा रही है। अब तो मुझे भी नौ बजने का इंतजार रहता है। बड़े होने के बाद धनुष लिए हुए भगवान राम की छवि से मैं मंत्र मुग्ध हो गया। वैसे ही बनने की जिद करने लगा। मेरे शौक को देखते हुए नानी और मामा ने मुझे भगवान राम के रूप में सजाया। उस समय बड़ा मजा आया, जब सभी मेरे पैर छूने लगे। मैंने भी सीरियल की देखा-देखी आयुष्मान भव कहते हुए सबको आशीर्वाद दिया। - प्रबल चावरानी, राजेंद्र नगर

मां कहतीं हैं कुछ अ'छी आदतें सीख लो

पापा ने मेरे जन्मदिन पर उपहार में गेम दिया था। जिसे एक दो बार खेल कर रख दिया था कि अब परीक्षा खत्म होने के बाद खेलूंगा। अब छुट्टियां मिली हैं तो लूडो, कैरम सहित सारे गेम बाहर आ गए हैं। दोपहर में छोटी बहन के साथ खेलता हूं। कभी-कभी खेलते समय हम दोनों में झगड़ा हो जाता है तो मम्मी कहती हैं कि रोज रामायण तो बहुत ध्यान से देखते हो। कुछ अ'छी आदतें भी सीख लो। छोटी बहन जिद कर रही है तो उसकी बात मानकर पहली चांस चलने का मौका उसे ही दे दो। कुछ समय तक तो मम्मी की बात का असर रहता है फिर कुछ घंटे बाद से हम दोनों में लड़ाई चालू हो जाती है। खाना खिलाने में मम्मी की मदद करता हूं। जब मम्मी रोटियां सेंकती हैं तो मैं सबकी थाली में पहुंचाता हूं । - वेदांश शुक्ला, कूड़ाघाट।

नौ बजे तक खत्म हो जाता है काम

मुझे तो ये छुट्टियां बहुत रास आ रही हैं। हर काम के लिए पर्याप्त समय। स्कूल और कोचिंग की कोई हड़बड़ी नहीं। आराम से सो कर उठती हूं। फिर नाश्ता करते हुए सबके साथ रामायण देखती हूं। ड्राइंग बनाने में हमेशा से मन लगता था पर पढ़ाई से फुर्सत ही नहीं मिलती थी। अब रोज दोपहर में सुकून से ड्राइंग बना रही हूं। पेड़ की कई शाखाएं बनाई हैं, जिस पर ढेर सारे रंग-बिरंगे पक्षी बैठे हुए हैं। मेरे साथ मम्मी भी अपना सिलाई कढ़ाई का काम करती रहती हैं। शाम की चाय मैं बनाती हूं। फिर इसके बाद हम दोनों मिलकर रात के खाने की तैयारी में जुट जाते हैं ताकि नौ बजे रामायण आने के पहले किचन का सारा काम सिमट जाए। - निष्ठा गुप्ता, लालडिग्गी। 

Posted By: Pradeep Srivastava

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