गोरखपुर : दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में गाय पालना कर्मचारियों को महंगा पड़ गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इनके पाले जाने को स्वच्छ भारत मिशन की राह में बड़ा रोड़ा बताते हुए करीब 20 कर्मचारियों का वेतन रोक दिया है। यह भी आरोप लगाया गया है कि यह कर्मचारी गाय-भैंस का व्यवसायिक इस्तेमाल कर रहे हैं और विश्वविद्यालय के बिजली-पानी और संसाधन का दुरुपयोग हो रहा है।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने पिछले दिनों हीरापुरी कॉलोनी और याक्ची कंपाउंड में इस बाबत निरीक्षण भी कराया था। निरीक्षण में मिले ऐसे लोगों पर कार्रवाई की जा रही है। गोपालकों पर सख्ती करने के पीछे दर-असल कुछ शिक्षकों और कर्मचारियों की ओर से आई आपत्तियां मुख्य कारण हैं। प्रदेश सरकार के ऑनलाइन शिकायत पोर्टल पर जानवरों से हो रही गंदगी बाबत समस्या के निदान की गुजारिश की गई थी। इसका संज्ञान लेते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने ऐसे कर्मचारियों की पड़ताल कराई, जो पशुपालन करते हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन के इस आदेश का अंदर-ही अंदर विरोध भी हो रहा है। लोगों का कहना है कि अपने इस्तेमाल से बचे दूध को जरूरतमंद को कुछ रुपयों के बदले उपलब्ध करा देना गलत नहीं है। इस आदेश के बाद केवल कर्मचारी ही नहीं, अपितु वह प्रोफसर भी प्रभावित होंगे जिन्होंने गाय पालने की तैयारी की हुई है। व्यवसायिक इस्तेमाल स्वीकार नहीं

दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलसचिव सुरेश चंद्र शर्मा का कहना है कि जानवर पालने से हो रही गंदगी को लेकर आइजीआरएस पर कई शिकायतें की गई थीं। विश्वविद्यालय के आवासीय परिसर से इन जानवरों का व्यवसायिक इस्तेमाल किया जाना स्वीकार नहीं है। कुलपति के आदेश के मुताबिक वेतन रोके जाने की कार्रवाई की गई है।

Posted By: Jagran