गोरखपुर, जागरण संवाददाता : संतकबीर नगर जिले के धनघटा तहसील क्षेत्र से होकर बहने वाली सरयू नदी का जलस्तर लगातार कम हो रहा है, लेकिन इस बीच नदी की कटान तेज हो गई है। पिछले कुछ दिनों में ही नदी ने करीब पांच सौ मीटर तक कटान करते हुए बंधे तक पहुंच गई है। सरयू के खतरनाक रुख को देखकर तटवासी सहमे हैं। जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक के साथ तुर्कवलिया स्थित कटान स्थल का जायजा लिया। उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों से किसी भी तरह की लापरवाही बरतने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी। इसके साथ ही ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि प्रशासन उनके साथ है।

खतरे से निशान से 85 सेंटीमीटर नीचे बह रही नदी

तहसील क्षेत्र में सरयू नदी का जलस्तर 78. 500 मीटर था जो घटकर 78.400 पर आ गया। अब नदी खतरे के निशान से 85 सेंटीमीटर नीचे बह रही है। हालांकि इस बीच नदी कटान भी कर रही है, जिसके चलते तटवासी चिंतित हैं। तुर्कवलिया गांव के विरेंद्र यादव, राजेंद्र यादव, सुरेंद्र, मुसाफिर, केशव राजभर आदि का कहना है कि नदी की कटान अब भी जारी है। नदी के रुख को देखकर लग रहा है कि कटान अभी तेज होगी। इसको लेकर अगर विभाग जरा सा भी लापरवाह हुआ तो बंधा नहीं बचाया जा सकता। नदी कटान करते हुए बंधे तक पहुंच चुकी है। पिछले कुछ दिनों में ही नदी 500 मीटर की दूरी काटकर एमबीडी बंधे तक आ गई है। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता अजय कुमार ने कहा कि उनकी पूरी टीम बंधे की सुरक्षा के लिए दिन-रात लगी है। कटान स्थल पर बोल्डर डालने का काम किया जा रहा है। इस बीच काफी हद तक कटान पर अंकुश लग गया है।

एसपी के साथ कटान स्थल पर पहुंंची डीएम

दिन में करीब दो बजे जिलाधिकारी दिव्या मित्तल और पुलिस अधीक्षक डा. कौस्तुभ अधिकारियों की टीम के साथ तुर्कवलिया स्थित कटान स्थल पर पहुंची। उन्होंने जिम्मेदारों को निर्देश देते हुए कहा कि बंधे की सुरक्षा करना हमारी पहली जिम्मेदारी है। बंधे पर कोई आंच नहीं आनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बोल्डर के साथ ही अन्य उपाय किए जाएं जिससे कटान पर पूरी तरह से लगाम लग सके। बंधे की निगरानी चौबीस घंटे होनी चाहिए। इस दौरान एसडीएम योगेश्वर सिंह, तहसीलदार रत्नेश तिवारी अधिशासी अभियंता अजय कुमार, सहायक अभियंता सतीश कुमार, अवर अभियंता तेज बहादुर सिंह, मनोज सिंह आदि लोग मौजूद रहे। एमबीडी बंधे को लेकर पूर्व विधायक अलगू प्रसाद चौहान ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन एसडीएम को सौंपा।

Edited By: Rahul Srivastava