गोरखपुर। आज इंटरनेट मीडिया एक प्रभावी मंच है। इसका प्रभाव शिशु से लेकर हर आयु वर्ग पर दिखाई दे रहा है। फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर, व्हाट्सएप लगभग सभी के जीवन से जुड़े हैं। बहुत हद तक इन पर प्रसारित विचार और सूचनाएं हमें अपने से जोड़ लेती हैं। हम भी अपनी सोच बनाने लगते हैं। इसके जरिये सकारात्मक और नकारात्मक सूचनाओं का अलग-अलग प्रभाव पड़ता है। ऐसी सूचनाओं से छात्र भी प्रभावित होता है।

बच्चों में नकारात्मकता को बढ़ावा देता है अभद्र भाषा

इंटरनेट मीडिया पर पर चलने वाले डिबेट के अंश में किया गया अभद्र भाषा का प्रयोग छात्र में नकारात्मकता को बढ़ाने में सहायक होता है। संतों के प्रवचन में जो भाषायी मर्यादा होती है, वह छात्रों की भाषा को परिष्कृत और परिमार्जित करने के साथ ही उनके नैतिक उन्नयन के पथ को भी आलोकित करती है। इस पर चलने वाले शिक्षा के कार्यक्रमों में शिक्षकों की भाषायी उच्चता छात्रों की भाषा को सकारात्मकता संबद्ध करती है। ऐसे में यदि मर्यादा में रहकर इंटरनेट मीडिया का प्रयोग हो तो बेहतर होगा।

अभिभावकों के बातचीत का बच्चों पर पड़ता है असर

गोरखपुर के महाराणा प्रताप इंटर कालेज के हिंदी प्रवक्ता डॉ. फूलचंद प्रसाद गुप्त ने बताया कि इंटरनेट मीडिया पर अभिभावक और शिक्षक के बातचीत से सबसे अधिक छात्र ही प्रभावित होता है। अभिभावक इंटरनेट मीडिया पर जिस प्रकार की भाषा का प्रयोग करता है, उसका प्रभाव उसके पाल्य पर अवश्य ही पड़ता है। अभिभावक को चाहिए कि वह अपने पाल्य की भाषायी मर्यादा को बनाये रखने के लिए परिमार्जित और शिष्ट भाषा का प्रयोग करें।

हृदय को चोट पहुंचा सकते हैं आपको शब्द

भाषा विचार-विनिमय और भावाभिव्यक्ति का साधन है। भाषा की शक्ति शब्दों में निहित होती है। शब्दों में शक्ति होती है। इसी शक्ति के बल पर शब्द प्रभावशाली होते हैं। इसलिए विचारों और भावनाओं की अभिव्यक्ति करते समय शब्दों का चयन आवश्यक हो जाता है। शब्द हृदय को चोट भी पहुंचाते हैं और शीतलता भी। इंटरनेट मीडिया पर बातचीत करते समय यह ध्यान रखना होगा कि हमारी बातचीत किसी भी तरह से अभद्रता को प्राप्त न करे। इस पर चलने वाली बहस और उसमें की गई अभद्र टिप्पणियां, अमर्यादित भाषा का प्रयोग छात्र में नकारात्मकता का भाव पैदा करते हैं। हमारे बातचीत का स्तर प्रभावकारी होना चाहिए, जिससे दूसरा भी उससे कुछ सकारात्मक सीख सके।

Edited By: Pragati Chand