गोरखपुर, जागरण संवाददाता। जिले में तीसरी लहर में लगभग पांच हजार लोग संक्रमित हो चुके हैं, लेकिन जीनोम सिक्वेंसिंह के लिए नमूने न भेजे जाने से अभी तक यह पता नहीं चल सका है कि यहां कोरोना के किस वैरिएंट का प्रभाव सबसे ज्यादा है। पूरे देश में तीसरी लहर में ओमिक्रोन का प्रभाव सबसे ज्यादा है। बावजूद इसके जीनोम सिक्वेंसिंग के मामले में जिला उदास है।

दिसंबर में भेजे गए थे पांच नमूने

दिसंबर 2021 में बीआरडी मेडिकल कालेज के माइक्रोबायोलाजी विभाग ने जीनोम सिक्वेंसिंह के लिए पांच नमूने किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू), लखनऊ भेजा था। इसमें देवरिया के तीन, गोरखपुर तथा कुशीनगर के एक-एक संक्रमितों के नमूने थे। इसके बाद एक भी नमूना जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए नहीं भेजा गया है। जो नमूने भेजे गए हैं, उनमें से देवरिया निवासी एक 15 वर्षीय एचआइवी पीडि़त किशोर की रिपोर्ट आई है। वह डेल्टा से पीडि़त था। 15 दिसंबर 2021 को मेडिकल कालेज में इलाज के दौरान उसकी मौत हो चुकी है। शेष चार नमूनों की रिपोर्ट अभी तक नहीं आई है। जिले से अभी तक का अंतिम नमूना 20 दिसंबर 2021 को भेजा गया है।

जीनोम सिक्‍वेसिंग से ही हो सकती है ओमिक्रोन की जांच

ओमिक्रोन की जांच का अभी तक एक ही उपाय है जीनोम सिक्वेंसिंह। इंडियन काउंसिल आफ मेडिकल रिसर्च व टाटा ने किट भी बनाई है, जिससे ओमिक्रोन के संक्रमण का पता लगाया जा सकता है, लेकिन वह किट अभी गोरखपुर में नहीं आई है।

केजीएमयू ने नमूने भेजने से किया मना

बीआरडी मेडिकल कालेज के माइक्रोबायोलाजी विभाग के अध्‍यक्ष डा. अमरेश कुमार सिंह बताते हैं कि केजीएमयू ने अभी नमूने भेजने के लिए मना कर दिया है। वहां से कहा गया है कि पूरे प्रदेश से नमूने आए हैं, अभी जांच का भार ज्यादा है। जब कहा जाएगा, तब नमूने भेजिएगा। मेरे पास लगभग 20 नमूने जीनोम सिक्वेसिंग के लिए रखे हुए हैं। वहां से निर्देश मिलते ही भेज दिया जाएगा।

Edited By: Navneet Prakash Tripathi