सिद्धार्थनगर : सामुदायिक शौचालय सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं में से एक योजना है। ग्राम पंचायतों में इसके निर्माण को लेकर शासन-प्रशासन के लोग गंभीर हैं। समीक्षा बैठक के अलावा जिम्मेदार अधिकारी वीडियो कांफ्रेंसिग के जरिये इसकी समीक्षा और जरूरी निर्देश देते हैं। परंतु भनवापुर विकास खंड अंतर्गत कई गांवों में जिम्मेदार योजना का पलीता लगा रहे हैं। कहीं पर नींव डालकर निर्माण ठप हो गया तो कुछ ऐसे भी शौचालय हैं, जिसकी एक तरफ दीवार की रंगाई-पोताई कराकर इसे पूर्ण दिखा दिया गया, जबकि अभी भी ये शौचालय अधूरे हैं।

महीनों से सामुदायिक शौचालय अधूरा है, केवल एक तरफ की दीवार को पेंट कराकर जीयोटैग करा दिया गया, इसके बाद कार्य ठप हो गया। स्वच्छता एक्सप्रेस का नाम देकर इसको बहुत सुंदर बनाया गया है। परंतु अभी अधूरा है। संचालन के लिए समूह की महिला को जिम्मेदारी दी गई है, जिनको प्रति माह नौ हजार का भुगतान होना है, यहां शौचालय संचालित नहीं हो रहा है, इसके बाद भी अगर भुगतान किया गया तो यह जांच का विषय है।

सामुदायिक शौचालय अधूरा है। यहां भी एक तरफ की दीवार पर पेंटिग कराकर अधिकारियों को भ्रमित करने का प्रयास किया गया। सच्चाई यह है कि में अभी न तो टंकी का निर्माण कराया गया और न तो सीट ही लगाई है। दीवार भी अभी अधूरी है। जिले के अधिकारी बैठकों में निर्देश देते हैं, परंतु उसका अनुपालन कैसे होता है, इसके लिए स्थलीय निरीक्षण की आवश्यकता है। ये भी देखना होगा, कि कागज में संचालन दिखाकर कहीं फर्जी भुगतान तो नहीं हो रहा है।

यहां सामुदायिक शौचालय बाहर से चमक रहा है लेकिन हर वक्त ताला लटक रहा है। नल का हैंडल निकाला रहता है। यदि ग्रामीण शौच के लिए इसका प्रयोग करना चाहतें तो न तो ताला खुला मिलेगा और न ही पानी की सुविधा मिलेगी। मजबूरी में लोगों को बाहर ही शौच करना पड़ता है। पिछले दिनों ब्लाक प्रशासन की ओर से शौचालय संचालन के लिए समूह की महिलाओं को तीन-तीन महीने का 27-27 हजार भुगतान किया गया, ये ग्रामसभा उसमें शामिल है, जांच पर ही पता चल सकेगा।

इस गांव की स्थिति ये है कि नींव डालकर निर्माण ठप कर दिया गया। करीब एक वर्ष पहले इसका निर्माण शुरू हुआ था, कुछ दिन काम हुए, फिर अधूरा ही छोड़ दिया गया। अब इसका कोई पुरसाहाल नहीं है। ग्रामीणों को शौच के लिए बाहर जाना पड़ता है। सरकार का स्वच्छता अभियान फेल है, बावजूद इसके जिम्मेदारों की ओर से कोई रुचि नहीं दिखाई दे रही है। निर्माण फिर से कब शुरू होगा और कब इसका संचालन होगा, किसी को पता नहीं है।

पुदुन, शमसुल्लाह, गेलई, सूरज आदि का कहना है कि सामुदायिक शौचालय के निर्माण में खूब मनमानी की जाती है, जिम्मेदार स्थलीय निरीक्षण करते नहीं है, इसलिए सच्चाई का पता नहीं लग रहा है। कुछ जगहों पर शौचालय कागज में संचालित हो रहे हैं जिसके नाम पर फर्जी भुगतान भी कर दिया जा रहा है, जिसकी जांच की आवश्यकता है।

खंड विकास अधिकारी धनंजय सिंह ने कहा कि बभनी और गदाखौवा गांव के सचिव राकेश पाठक थे, जिनके विरुद्ध करीब ढाई करोड़ की रिकवरी की कार्रवाई चल रही है, इसकी जांच बीडीओ डुमरियागंज कर रहे हैं। दो अन्य जगहों की जहां बात है तो वहां सचिव बदल गए हैं, तीन-चार दिन के अंदर वहां भी अधूरे कार्य प्रारंभ करने के निर्देश दिए गए हैं, यदि कार्य नहीं कराए जाते तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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