गोरखपुर, जागरण संवाददाता। Hallmark's New Guideline: हालमार्क गहने बेचने की अनिवार्यता के बीच बीआइएस (भारतीय मानक ब्यूरो) ने बिना हालमार्क वाले पुराने गोल्ड ज्वेलरी के स्टाक की जानकारी 31 अगस्त तक बीआइएस के पोटर्ल पर अपलोड करने का निर्देश दिया था। इसको लेकर देशभर के सर्राफा कारोबारी लगातार विरोध कर रहे थे। कारोबारी नुकसान का हवाला देकर समय सीमा बढ़ाए जाने की मांग कर रहे थे। विरोध और आागामी त्योहारों को देखते हुए सरकार ने पुराने गोल्ड ज्वेलरी के स्टाक की जानकारी देने की मोहलत बढ़ाकर 30 नवंबर कर दी है। इससे उन कारोबारियों को राहत मिली है जिनके पास बड़ी मात्रा में पुराना स्टाक है।

देश के 256 जिलों में 16 जून से अनिवार्य रूप से लागू हो चुका है हालमार्क

देश के 256 जिलों में 16 जून से हालमार्क अनिवार्य रूप से लागू हो चुका है। इसमें गोरखपुर भी शामिल है। हालमार्क में इस समय 14, 18, 20 और 22 कैरेट लागू है, जबकि बिना हालमार्क वाले 23 कैरेट गोल्ड के ज्वेलरी भी बिक रहे हैं। अगर 18 कैरेट से कम शुद्धता के जेवरों को हालमार्क कराना पड़ा तो उन पर 14 कैरेट की ही मुहर लगेगी। इससे सराफा कारोबारियों को नुकसान होगा। 18 कैरेट का मतलब ज्वेलरी में 75 फीसद शुद्ध सोना और 14 कैरेट का मतलब सिर्फ 58.5 फीसद शुद्धता है। इससे जिन जेवर में सोना ज्यादा है, वे भी 14 कैरेट के भाव से बिकेंगे।

पुराना स्‍टाक रखने वाले व्‍यापार‍ियों को राहत

कम कीमत में जेवर की मांग के चलते 18 कैरेट से कम शुद्धता वाले बहुत अधिक ज्वेलरी सर्राफा दुकानदारों के पास है। उन्हें लगता है कि त्याेहारों और लगन में उनका पुराना माल बिक जाएगा और हालमार्क के झंझट से भी मुक्त रहेंगे। इसी मुद्दे को लेकर हाल में ही सर्राफा कारोबारियों ने पूरे देश में एक दिन की बंदी का आह्वान किया था। गोरखपुर सर्राफा मंडल के महामंत्री महेश वर्मा ने बताया कि सरकार ने बिना हालमार्क वाले गोल्ड ज्वेलरी के स्टाक की जानकारी देने की समय सीमा बढ़ाकर 30 नवंबर तक कर दी है। इससे उन कारोबारियों को राहत िमलेगी जिनके पास बड़ी मात्रा में बिना हालमार्क वाली ज्वेलरी का पुराना स्टाक है। उन ज्वेलरी पर हालमार्क कराने या गलाने दोनों सूरत में व्यापारियों को ही नुकसान होता।

Edited By: Pradeep Srivastava