गोरखपुर, जेएनएन। गोरखपुर महोत्‍सव का समापन समारोह कई खट्टी मीठी यादें छोड़ गया। पास को लेकर हुई भारी फजीहत और फ‍िर समापन समारोह एक दिन टलने के बाद जब मंगलवार को कार्यक्रम का रंगारंग समापन हुआ तो लोगों की सारी शिकायतें दूर हो गईं। अनुराधा पौडवाल, गायक केके ने मुक्‍त कंठ से आयोजन की तारीफ की और सब कुछ सकुशल संपन्‍न होने के बाद अधिकारियों ने भी राहत की सांस ली।

अनुरोधा पौडवाल ने कहा, संवेदना के स्वर पर परवान चढ़ता है संगीत

मशहूर गायिका पद्श्री अनुराधा पौडवाल का मानना है कि संगीत, संवेदना के स्वर पर ही परवान चढ़ता है। इसलिए हर गायक को पहले संवेदनशील होना होगा। जो जितना संवेदनशील होगा, उतना अच्‍छा गायक बन सकेगा। आजकल बहुत छोटे ब'चे रियल्टी शो में बहुत अच्‍छा कर जाते हैं। इसमें संवेदना काम करती है, रियाज नहीं। यह संवेदना गाड गिफ्टेड होती है। अनुराधा पौडवाल गोरखपुर महोत्सव में आई थीं।

जागरण से बातचीत में एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि जरूरत के अनुसार गीतों को हाईपिच दी जाती है, इससे मिठास बढ़ती है, क्योंकि गीतों की वह जरूरत होती है। हाईपिच वाले गीतों को यदि धीमे स्वर में गाया तो अलबत्ता मिठास कम हो सकती है। उन्होंने कहा कि मैंने समाज को बहुत कुछ दिया है, कुछ नया दे सकूं और अ'छा कर सकूं तो यह मेरा सौभाग्य होगा। अब उनका झुकाव फिल्मी दुनिया से हटकर भजनों की तरफ हो गया है। साथ ही वंचित और उपेक्षित तबके के विकास के लिए काम कर रही हैं। बकौल अनुराधा जल संरक्षण के क्षेत्र में महाराष्ट्र के बीड़ क्षेत्र में उन्होंने पहल करके लगभग सौ किलोमीटर नहर की सिल्ट साफ करवाई और जब बारिश हुई तो पूरी नहर पानी से भर गई। उन्होंने कहा कि अब इस तरह के कार्य करने में मुझे आनंद आने लगा है। यह पूछने पर कि क्या संगीत को अब भी उतना ही समय दे पाएंगी? उन्होंने कहा कि संगीत व सेवा दोनों की साधना साथ-साथ चलती रहेगी। फिल्म कालीचरन, आशिकी, दिल है कि मानता नहीं, लाल दुपट्टा मलमल का आदि फिल्मों में उनके गीत काफी लोकप्रिय हुए। इसके बाद टी-सीरीज से निकले उनके भजनों के कैसेट को इतनी सराहना मिली कि उन्होंने फिर भजन व भगवान को जीवन का अंग बना लिया।

पब्लिक के रिस्पांस से मिलती है एनर्जी : केके

बजरंगी भाईजान, गैंगेस्टर, हम दिल दे चुके सनम जैसी बॉलीवुड की कई सुपरहिट फिल्मों में अपनी आवाज का जादू बिखेर चुके मशहूर गायक केके (कृष्ण कुमार कुन्नथ) को लाइव प्रस्तुति से थकान नहीं होती। पब्लिक के रिस्पांस से चार्ज होने वाली एनर्जी स्टेज पर उन्हें और बूस्टअप कर देती है। हर तरह का गाना सहजता से गाने को तैयार रहने वाले केके मानते हैं कि पायरेटेड मार्केट से बॉलीवुड और संगीत की दुनिया दोनों को नुकसान हो रहा है। फिल्मी दुनिया में छोटे शहरों से पहुंचने वाले गायकों के सवाल पर वह कहते हैं कि आपमें टैलेंट है तो उसके कद्रदान जरूर मिलेंगे, भले ही थोड़ा वक्त लग जाए। गोरखपुर महोत्सव के अंतिम दिन बॉलीवुड नाइट में स्टेज शो करने पहुंचे केके ने जागरण से बातचीत में गीत-संगीत से जुड़े कई पहलुओं पर चर्चा की। बाबुल सुप्रियो और रवि किशन के सांसद बनने के बाद वह राजनीति में जाने के बारे में क्या सोचते हैं? सिंगर केके ने दोनों को अपना मित्र बताते हुए कहा कि फिलहाल राजनीति में एंट्री का कोई विचार नहीं है। अभी मैं सिर्फ अपने गाने पर फोकस कर रहा हूं। स्टेज पर लाइव परफार्मेंस की चर्चा छिड़ी तो केके ने स्टूडियो में रिकॉर्डिंग और लाइव परफॉर्मेंस को लेकर अपने अनुभव साझा किए। कहा कि स्टेज परफॉर्मेंस पका-पकाया खाना खाने जैसा होता है जबकि रिकॉर्डिंग खाना बनाने जैसा।

मयूर नृत्य में गीतांजलि के साथ झूमा पंडाल

महोत्सव के पंडाल में अंतरराष्ट्रीय फेम की गीतांजलि शर्मा ने दर्शकों को अपने साथ झूमने पर मजबूर कर दिया। मयूर नृत्य की विभिन्न मुद्राओं पर लोग अपने स्थान पर बैठे-बैठे ही थिरकते रहे और गुनगुनाते रहे...बरसाने की कुटी पे मोर बन आयो रसिया। ब्रज के आंगन में पली बढ़ीं यशभारती से सम्मानित गीतांजलि ने आधे घंटे तक मयूर नृत्य प्रस्तुत कर लोगों को मुरीद बना लिया। साथी कलाकारों के साथ ब्रज वंदना की उन्होंने मनमोहक प्रस्तुति दी। उसके बाद वियोग में राधा को मनाने पहुंचे कृष्ण की प्रस्तुति देख दर्शक निहाल हो उठे। गीतांजलि ने रूठी राधा का किरदार निभाया और शास्त्रीय विधा में नृत्य के जरिए वह दर्शकों को लुभाती रहीं। इस दौरान कृष्ण व गोपिकाओं की भूमिका में साथी कलाकार मंच पर मोर बनकर पहुंचे तो दर्शक भी झूमने पर मजबूर हो गए। देर तक पंडाल में लोग गीतों के बोल गुनगुनाते रहे। गीतांजलि ने इसके अलावा सांवरिया नृत्य, मटका भवई नृत्य आदि प्रस्तुत करके खूब वाहवाही बटोरी।

सूर्य, चांद, तारों को नजदीक से देखा बच्‍चों ने

परिषदीय स्कूलों के 1550 बच्‍चों ने नक्षत्रशाला भ्रमण किया। उन्होंने सूर्य, चांद, तारों व अन्य ग्रहों-उपग्रहों को नजदीक से देखा। साथ ही आइआइटी कानपुर की साइंस बस, कठपुतली डांस, विभिन्न वैज्ञानिक प्रयोगों से उनका ज्ञानवर्धन किया गया। विज्ञान की दुनिया में उन्होंने भरपूर मनोरंजन भी किया। गोरखपुर महोत्सव के अंतर्गत बच्‍चों ने सिनेमाघरों में शिक्षाप्रद व मनोरंजक फिल्में देखीं। साथ ही रेल म्यूजियम का भी भ्रमण किया। नक्षत्रशाला देखने के बाद ब'चों ने कहा कि ग्रह और नक्षत्र इतने बड़े होते हैं क्या? वैज्ञानिकों ने उनकी  जिज्ञासाओं को शांत किया। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी भूपेंद्र नारायण सिंह ने कहा कि ब'चों के अंदर की वैज्ञानिक भावना को बाहर लाना व अंतर्निहित गुणों का विकास कर उन्हें सफलता के शिखर पर पहुंचाना ही इन कार्यक्रमों का प्रमुख उद्देश्य है। नक्षत्रशाला का भ्रमण करने से ब'चों को ग्रह, नक्षत्र और सौरमंडल का बेहतर ज्ञान होगा। वह बहुत कुछ सीखेंगे।

बही सुरों की सरिता, झूमे लोग

गोरखपुर महोत्सव के अंतिम दिन मंगलवार को मुख्य मंच पर आयोजित सबरंग में गीत-संगीत की सरिता बही। हर प्रस्तुति ने श्रोताओं को झूमने पर विवश किया। श्रोताओं ने तालियां बजाकर कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।

आरपीएम एकेडमी, ग्रीन सिटी की म्यूजिक टीचर सलोनी मिश्रा ने 'मेरे रश्के कमर, तूने पहली नजर' प्रस्तुत किया तो श्रोताओं ने जोरदार तालियों से उनका स्वागत किया। इसके बाद उन्होंने क्रमश: 'माही वे मोहब्बतां', 'मिले हो तुम हमको बड़े नसीबों से' व 'मुस्कराने की वजह तुम हो' गीतों से माहौल को खुशनुमा बना दिया। गौतम प्रसाद मिश्रा ने सूफी गीत 'दमादम मस्त कलंदर' प्रस्तुत कर माहौल को भक्तिमय कर दिया।

प्रतिभा को मिला मंच तो छा गए

टैलेंट हंट के लिए चयनित कलाकारों को गोरखपुर महोत्सव का मंच मिला तो वह छा गए। खनकते सुर, अभिनय, नृत्य के जरिये प्रतिभागियों ने लोगों को जमकर रिझाया। मंत्रमुग्ध दर्शकों ने तालियों की गडग़ड़ाहट से उनका स्वागत किया। टैलेंट हंट में सदफ अल्माश ने 'और इस दिल में क्या रखा है' गाकर लोगों को भावविभोर कर दिया। आश्वी शर्मा के 'मैनू समझांवा' गीत पर नृत्य को लोगों ने खूब सराहा। अंजना मिश्रा ने पचरा गाकर लोगों को भावविह्वल कर दिया। रौनक मिश्रा ने तबला वादन करते हुए तीन ताल व कायदा बजाया तो वहीं शिवपूजन ने गले से बांसुरी के स्वर में 'अंखियों के झरोखे' से गीत सुनाया। भोजपुरी का तड़का देते हुए नुपुर सरकारी ग्रुप की उर्वशी श्रीवास्तव, पूजा निषाद, अर्पिता सिंह, रुचिका गौड़ ने जब 'नई झुलनी के छइयांÓ गाया तो पूरा पंडाल झूम उठा। अग्रिमा और अनन्या ने श्रीकृष्ण राधा का भाव नृत्य प्रस्तुत कर लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसी क्रम में केतन यादव ने वीर रस की कविता, अजीत ने बाबा गोरक्षनाथ पर आधारित गीत, अर्पिता, पूजा, उर्वशी ने एकल गायन प्रस्तुत कर लोगों को झूमने पर विवश कर दिया।

बही सुरों की सरिता, झूमे लोग

गोरखपुर महोत्सव के अंतिम दिन मंगलवार को मुख्य मंच पर आयोजित सबरंग में गीत-संगीत की सरिता बही। हर प्रस्तुति ने श्रोताओं को झूमने पर विवश किया। श्रोताओं ने तालियां बजाकर कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।

स्मारिका और मंथन के संपादन की हुई तारीफ

गोरखपुर महोत्सव के समापन मंच से जब 'स्मारिका' और 'मंथन' पत्रिका का विमोचन हो गया तो उसे लोगों में वितरित किया। जिसके हाथ भी पत्रिका लगी, उसने उसके संपादन की जमकर तारीख की। गोरखपुर के एक वर्ष के विकास को रेखांकित करती पत्रिका 'मंथन' का संपादन प्रो. राजवंत राव और प्रो. हर्ष कुमार सिन्हा ने किया है। सह संपादक अविनाश प्रताप सिंह और संपादन सहयोग डॉ. रामप्यारे मिश्रा, डॉ. मनिंद्र यादव व डॉ. प्रकाश प्रियदर्शी का है।  'स्मारिका' का संपादन डॉ. अविनाश प्रताप सिंह ने किया है। इसके संपादन में डॉ. राम प्यारे मिश्र, डॉ. मनिंद्र यादव और जिला सूचना अधिकारी प्रशांत कुमार श्रीवास्तव की भूमिका रही है। 

Posted By: Pradeep Srivastava

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