गोरखपुर, जेएनएन। ट्रेन लेट होने से अगर किसी यात्री को असुविधा हुई तो, रेलवे को बताना पड़ेगा कि देरी की वजह क्या थी ? जिम्मेदार ने हीलाहवाली की तो जवाबदेही उनके अधिकारी की हो जाएगी। रेलवे बोर्ड के ज्वाइंट डायरेक्टर ट्रैफिक (समय पालन) का यह आदेश सभी जोनल कार्यालयों में पहुंच चुका है। 

बगैर निस्तारण के बंद कर दी जाती हैं 40 फीसद ऑनलाइन शिकायतें

भारतीय रेल में ऑनलाइन शिकायतों की संख्या तो बढ़ी है, लेकिन निस्तारण की गुणवत्ता और रफ्तार संतोषजनक नहीं है। रेलवे बोर्ड की समीक्षा में पता चला है कि 'समय पालन' से संबंधित ऑनलाइन शिकायतों का निपटारा जोनल स्तर पर बिना देखे और सोचे-समझे ही कर दिया जा रहा है। विलंबन की शिकायतें 15 मिनट में ही निस्तारित कर दी जा रही हैं तो 40 फीसद को देखे बिना ही क्लोज कर दिया जाता है।

रेलवे में ऑनलाइन शिकायतों के निस्तारण में नहीं चलेगी हीलाहवाली

शिकायतकर्ता को जवाब देना भी विभाग उचित नहीं समझता। ट्विटर और सोशल मीडिया के अन्य प्लेटफार्म पर आने वाली ज्यादातर शिकायतें इसके बाद बोर्ड और मंत्रालय पहुंच जा रही हैं। इससे विभाग की छवि तो खराब होती ही है उपभोक्ताओं की सही बात भी रेलवे तक नहीं पहुंच पाती। ऐसी शिकायतों पर संज्ञान लेने के बाद ही रेलवे बोर्ड ने जवाब देने की जिम्मेदारी तय की है।

जोनल कार्यालयों को करना होगा शिकायतों का निपटारा

नई व्यवस्था के तहत रेल मदद व अन्य सोशल प्लेटफार्मों के जरिये विशेषकर ट्रेनों के समय पालन से संबंधित शिकायतों का निपटारा जोनल कार्यालयों को करना होगा। ट्रेनों के विलंबन का कारण तो अनिवार्य रूप से बताना होगा। इसमें किसी भी तरह की उदासीनता नहीं चलेगी। ऐसा हुआ तो संबंधित विभागों के अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। 

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