गोरखपुर, जेएनएन। पूर्वोत्तर रेलवे कर्मचारी संघ ने सरकार पर रेलवे  का निजीकरण करने की साजिश रचने का आरोप लगाते हुए चेतावनी दी है कि यदि ऐसा हुआ तो कर्मचारी इसे किसी भी दशा में बर्दाश्‍त नहीं करेंगे। गोरखपुर में पूर्वोत्तर रेलवे कर्मचारी संघ (पीआरकेएस) के सम्मेलन में रेलकर्मियों ने निजीकरण और निगमीकरण के विरोध में जमकर हल्ला बोला।

 

रेलवे पर लगाया आरोप

नेशनल फेडरेशन आफ इंडियन रेलवे मेन (एनएफआइआर) के महामंत्री डा. एम. राघवैया की मौजूदगी में रेलकर्मियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और पुरानी पेंशन बहाली को लेकर भी अपनी आवाज बुलंद की। एनएफआइआर के महामंत्री ने कहा कि सरकार कर्मचारियों और मजदूरों पर तानाशाही रवैया अपना रही है। सरकार सातवें वेतन आयोग की विसंगतियों को लेकर उदासीन है। रेलवे को निजी हाथों में सौंपने का कुचक्र रच रही है।

रेल कर्मियों से संघर्ष का आह्वान

कहा कि इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। निजीकरण, निगमीकरण और आउटसोर्सिंग को लेकर भारतीय रेलवे स्तर पर विरोध प्रदर्शन जारी है। उन्होंने रेलकर्मियों का आह्वान किया कि वे आगे बढ़कर निजीकरण और निगमीकरण का विरोध करें। उन्होंने याद दिलाया कि संघर्षों के बल पर किस तरह एनएफआइआर परेल शॉप प्रिंटिंग प्रेस को बचाने में सफल रहा है। यहां आकर पता चला है कि गोरखपुर में बोर्ड के किसी भी कर्मचारी हितों का नियम लागू नहीं किया गया है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है।

फायदे में है रेल कारखाना, फ‍िर भी बेचने की हो रही तैयारी

एनएफआइआर के प्रयासों के चलते गैंगमैनों को तकनीकी श्रेणी में लाकर ग्रेड पे 2800 तक लाया जा सका है। संयुक्त महामंत्री बीसी शर्मा ने कहा कि सभी रेल कारखाने फायदे में हैं, इसके बाद भी सरकार उन्हें बेचने पर आमादा है। ट्रैक मेंटेनर एसोसिएशन के महामंत्री जी गणेश्वर राव व अन्य पदाधिकारियों ने भी विचार रखे। अध्यक्षता एमपी शर्मा ने की। संघ के महामंत्री विनोद कुमार राय ने अतिथियों का स्वागत किया। प्रवक्ता एके सिंह ने संचालन किया।

Posted By: Pradeep Srivastava

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