गोरखपुर, जेएनएन। रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में खानपान के बिल को लेकर यात्रियों को परेशान होने की जरूरत नहीं है। रेल मंत्रालय ने भारतीय रेलवे स्तर पर नो बिल, नो पेमेंट नीति अनिवार्य रूप से लागू कर दिया है। यानी, रेलवे स्टेशन या ट्रेनों में खानपान के विक्रेता या पेंट्रीकार का वेंडर की ओर से बिल देना अनिवार्य कर दिया गया है। बिल देने पर ही यात्रियों को पेमेंट करना होगा। अगर वेंडर या विक्रेता खानपान का बिल नहीं देता है तो यात्री पेमेंट नहीं करेंगे।

रेलमंत्री ने किया ट्वीट

रेलमंत्री पीयूष गोयल ने ट्वीट के जरिये आम यात्रियों को जागरूक करते हुए अहम जानकारी दी है। रेलमंत्री ने कहा है कि रेलवे में नो बिल, नो पेमेंट की नीति अपनाते हुए विक्रेताओं द्वारा ग्राहकों को बिल देना अनिवार्य किया गया है।

ट्रेन या रेलवे स्टेशनों के प्लेटफार्मों पर यदि खानपान सामग्री का विक्रेता आपको बिल देने से इन्कार करता है तो आपको उसे पैसे देने की आवश्यकता नहीं है। दरअसल, ट्रेनों में और स्टेशनों पर वेंडरों और विक्रेताओं की मनमानी बढ़ गई थी। लगातार शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए रेल मंत्रालय ने यात्रियों को सहूलियत प्रदान करते हुए नो बिल, नो पेमेंट की नीति अपनाई है।

नो बिल नो पेमेंट

एक तो वेंडर बिल नहीं देते हैं, हिसाब करने पर यात्रियों से भिड़ जाते हैं। बिहार से दिल्ली जाने वाली ट्रेनों में आए दिन यात्रियों और वेंडरों में झड़प होती रहती है। हालांकि, नई नीति लागू होने से शिकायतों में कमी जरूर आई है लेकिन अधिकतर यात्रियों इस नई व्यवस्था की जानकारी नहीं है। हालांकि, रेलवे प्रशासन ने जागरूकता के तहत गोरखपुर सहित सभी प्रमुख स्टेशनों के खानापान स्टालों पर नो बिल नो पेमेंट का स्टीकर चस्पा करा दिया है।

Posted By: Pradeep Srivastava

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