गोरखपुर, प्रेम नारायण द्विवेदी। पूर्वोत्तर रेलवे के सभी रेल मार्गों पर 110 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेनें चलेंगी। ट्रेनों का समय पालन और बेहतर होने के चलते लेटलतीफी दूर होगी। ट्रैक पर गाड़ियों की क्षमता बढ़ेगी। आने वाले दिनों में गाड़ियां एक के पीछे एक चल सकेंगी। इसके लिए रेलवे बोर्ड ने दिशा- निर्देश जारी करते हुए सभी जोनल प्रमुख मुख्य इंजीनियरों (पीसीई) को प्रमुखता से तेजी के साथ रेल लाइनों की गति क्षमता बढ़ाने का अधिकार दे दिया है।

ट्रैक की गति बढ़ाने के लिए रेलवे बोर्ड ने जारी किया निर्देश, पीसीई को दिया अधिकार

नई व्यवस्था के तहत गोरखपुर कैंट- नरकटियागंज, गोरखपुर-भटनी-वाराणसी, गोरखपुर-आनंदनगर-नौतनवां और गोरखपुर-आनंदनगर-बढ़नी-गोंडा आदि रूटों पर भी ट्रेनें 110 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकेंगी।रेलवे प्रशासन को इन रेल मार्गों पर की गति क्षमता बढ़ाने के लिए बोर्ड और रेल संरक्षा आयुक्त (सीआरएस) का मुंह नहीं देखना होगा। इस कार्य के लिए जोनल स्तर पर प्रमुख मुख्य इंजीनियर ही सक्षम होंगे।

अभी तक जोन से तैयार प्रस्तार पर रेलवे बोर्ड की हरी झंडी और सीआरएस की सहमति के बाद ही रेल मार्गों की क्षमता बढ़ाने का कार्य हो पाता था। फिलहाल, पूर्वोत्तर रेलवे के बाराबंकी-गोंडा-गोरखपुर-छपरा 425 किमी मुख्य रेल मार्ग पर पहले से ही 110 किमी प्रति घंटे की गति से ट्रेनें चल रही हैं। यह मार्ग 130 किमी प्रति घंटे की रफ्तार के लायक तैयार हो चुका है। 160 किमी प्रति घंटे की क्षमता के लायक बनाने की योजना बन रही है। इसके अलावा बनारस- प्रयागराज और मऊ- शाहगंज रेलमार्ग पर ट्रेनें 110 किमी प्रति घंटा की गति से चल रही हैं।

160 की गति वाली बनेंगी नई रेल लाइनें

अब नई रेल लाइनें 160 किमी प्रति घंटा की गति क्षमता वाली तैयार होंगी। दोहरीकरण और तीसरी में रेल लाइनों की क्षमता भी 110 से 130 किमी प्रति घंटा की होगी। पूर्वोत्तर रेलवे की सहजनवां-दोहरीघाट लगभग 80 किमी तथा खलीलाबाद-बहराइच करीब 240 किमी नई रेल लाइनों पर ट्रेनें 160 की रफ्तार से चलेंगी। गोरखपुर कैंट-नरकटियागंज और भटनी-औड़िहार रूट की दूसरी लाइन (दोहरीकरण) पर तथा डोमिनगढ-गोरखपुर-कुसम्ही के रास्ते खलीलाबाद से बैतालपुर तीसरी रेल लाइन पर भी ट्रेनें 110 से 130 की गति से चल सकेंगी।

रेलवे ट्रेनों की गति बढ़ाने की दिशा में कार्य कर रही है। इसी क्रम में जिन रेल खण्डों की सेक्शनल गति 110 किमी प्रतिघंटा से कम है, उसे बढ़ाकर 110 किमी प्रतिघंटा तक किया जाना है। इसके लिए रेलवे बोर्ड द्वारा क्षेत्रीय रेल के प्रमुख मुख्य इंजीनियर को अधिकृत किया गया है, जिससे इन कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर तेजी से कराया जा सके। - पंकज कुमार सिंह, मुख्य जनसंपर्क अधिकारी- पूर्वोत्तर रेलवे।

Edited By: Pradeep Srivastava