गोरखपुर, जागरण संवाददाता। गोरखपुर शहर विजयादशमी के दिन अपनी अद्भुत परंपरा 'राघव-शक्ति मिलन' का पुन: साक्षी बना। जयघोष के बीच भगवान राम व मां शक्ति का मिलन गुरुवार को बसंतपुर तिराहे पर हुआ। भगवान राम ने मां की आरती की तो मां ने भगवान राम की प्रदक्षिणा की। इस दौरान वर्षा के बावजूद मुख्य अतिथि राज्यसभा सदस्य डा. राधामोहन दास अग्रवाल समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

भगवान राम के जुलूस में उमड़ी भक्तों की भीड़

भगवान राम ने शाम लगभग छह बजे बर्डघाट रामलीला मैदान में रावण का वध किया। थोड़ी देर विश्राम करने के बाद उनका रथ गाजे-बाजे व जुलूस के साथ रवाना हुआ। भगवान राम का रथ बसंतपुर तिराहे पर पहुंचा तो श्रद्धालुओं ने मुक्त कंठ से जयघोष किया। दूसरी तरफ शाम को दुर्गाबाड़ी की दुर्गा प्रतिमा जुलूस के रूप में निकली, उसके पीछे बड़ी संख्या में प्रतिमाएं थीं। गाजे-बाजे के साथ प्रतिमाओं का जुलूस बसंतपुर तिराहे पर पहुंचा। जयघोष से देर तक वातावरण गूंजता रहा। भगवान राम ने अपने रथ से ही मां की आरती की और दुर्गाबाड़ी की प्रतिमा को उसी स्थान पर घुमाकर प्रदक्षिणा कराई गई। मां का जुलूस राजघाट की तरफ रवाना हुआ। प्रतिमाओं का विसर्जन जुलूस निकल जाने पर भगवान राम का जुलूस हिंदी बाजार आकर समाप्त हुआ।

जयघोष के बीच विसर्जित हुईं दुर्गा प्रतिमाएं

जिला प्रशासन व नगर निगम के अथक परिश्रम से पोखरे के रूप में मूर्तियों के नदी विसर्जन का विकल्प समय से तैयार हो गया था। छोटी मूर्तियों का विसर्जन एकला व डोमिनगढ़ पोखरे में किया गया। चूंकि पोखरे पर ट्रक नहीं जा सकते थे, इसलिए जो बड़ी मूर्तियां थीं, पूजा समितियां उन्हें लेकर फोरलेन पर बने पुल पर चलीं गईं और वहां से नदी में विसर्जित कर दिया।

श्रद्धालुओं ने धूमधाम से निकाली शोभायात्रा

श्रद्धालुओं ने दुर्गा पंडालों से गाजे-बाजे के साथ नाचते-गाते, गुलाल उड़ाते, जयघोष करते देवी प्रतिमाओं की शोभायात्रा निकाली जो राप्ती नदी के एकला तट पर पहुंच कर समाप्त हुई। जहां श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा को नम आंखों से विदा किया। दूसरी तरफ डोमिनगढ़ में बनाए गए पोखरे में भी मूर्तियां विसर्जित की गईं।

शारदीय नवरात्र में नौ दिनों तक चले पूजन-अर्चन और षष्ठी के दिन दुर्गा पंडालों में स्थापित देवी प्रतिमाओं का चार दिनों तक अनवरत दर्शन-पूजन के बाद विजयादशमी के दिन उन्हें अंतिम विदाई दी गई।

नाचते-गाते चलते रहे श्रद्धालु

पंडाल खाली पड़ चुके थे, उनकी सारी रौनक, गाजा-बाजा सब एकला तट की दहलीज पर पहुंच गए थे। ट्रांसपोर्ट नगर चौराहे से राजघाट तक मेला लगा हुआ था। सड़क पर केवल श्रद्धालु थे और मां की प्रतिमाएं ट्रकों-ट्रालियों से ले जाई जा रही थीं। श्रद्धालु नाचते-गाते उत्सव व उल्लास के साथ जयघोष करते हुए चल रहे थे। दुर्गाबाड़ी से लेकर एकला तट तक दुर्गा प्रतिमाओं की लंबी कतार लगी रही। सबसे आगे दुर्गाबाड़ी की प्रतिमा और उसके पीछे क्रम से सभी प्रतिमाएं चल रही थीं।

Edited By: Pragati Chand

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