गोरखपुर, जेएनएन। 'अतिथि देवो भव:'। यह हमारी संस्कृति तो है ही परंपरा में भी शामिल है। इस भावना को आत्मसात करने वाले गोरखपुर नगर में राष्ट्र के सर्वोच्च पद पर आसीन राष्ट्रपति का आगमन हो रहा हो और अभिनंदन में कोई कोर कसर रह जाए, ऐसा न तो उचित है और न ही परंपरा के अनुकूल। शायद यही कारण है कि एयरपोर्ट से लेकर वाया कूड़ाघाट, मोहद्दीपुर तक की सड़क हो या फिर पैडलेगंज से लगायत छात्रसंघ चौराहा, बरास्ते विश्वविद्यालय रेलवे स्टेशन तक का मार्ग अथवा धर्मशाला से होकर गोरखनाथ पुल के रास्ते गोरखनाथ मंदिर तक की राह। हर जगह-हर कहीं, हर पल कुछ न कुछ रचनात्मक हो रहा है। दीवारों से लेकर सड़कों, नाले-नालियों तक की साफ-सफाई जोरों पर है, कभी अपने गड्ढों से पहचानी जाने वाली सड़कें आज चमचमाती हुई नजर आ रही हैं। गलत ढंग से लगाई गई होर्डिग उतारी जा रही हैं। दीवारों पर रचनात्मकता का संदेश देती हुई पेंटिंग उकेरी जा रही है,जिसने बदरंग और बेजान दीवारों को जीवंत सा कर दिया है। और इन सबके बीच अप्रत्याशित अतिक्रमणकारी का रवैया, जो एक अपील पर स्वत: ही अपना अवैध कब्जा हटाने को तैयार हैं। न कोई बहस न विवाद। सच में! गोरक्षनगरी सज रही है, गोरखपुर संवर रहा है, अपना शहर बदल रहा है।

संभव है कि प्रशासनिक अधिकारी शासन के आदेश के अनुरूप शहर को चमकाने में लगे हों, लेकिन जिस तत्परता के साथ शहर को संवारने का काम हो रहा है,उसके पीछे केवल आदेश के अनुपालन की मजबूरी हो, संभव नहीं। निश्चित ही आतिथ्य भाव वह कारक है जिसने प्रशासनिक अधिकारियों को दायित्व निर्वहन में उत्प्रेरक की भूमिका निभाई है। गोरखनाथ के जिस टेढ़े टेलीफोन के खंभे को मुख्यमंत्री के आदेश के एक वर्ष बाद तक न हटाया जा सका था, वह महज दो घंटे में शिफ्ट कर दिया गया। कभी अतिक्रमणकारियों की चपेट से सिमटी रही पैडलेगंज से छात्रसंघ चौराहे तक की सड़क, बगैर किसी बहस-विवाद के अपने असली स्वरूप में उभर कर आ गई है। बुद्घ द्वार से सर्किट हाउस तक की राह के कहने ही क्या। कल तक धूल से पटी, ऊबड़-खाबड़ रही यह सड़क आज किसी दूसरे देश की सड़क से टक्कर लेने को तैयार है। बिजली के खंभों पर लपेटी गई एलइडी लाइट की पट्टियां शहर की सर्द रात को अपनी विशिष्ट आभा से ऊष्मित कर रही हैं। प्रशासनिक अधिकारी हों या आम नागरिक हर कोई शहर में हो रहे इन बदलावों को लेकर मुदित है, प्रफुल्लित है। हर किसी को आशा है कि जब राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद इन मार्गो से होकर गुजरेंगे तो निश्चित ही उनके मन में गोरक्षनगरी की एक मनोरम छवि अंकित होगी।

Posted By: Jagran