गोरखपुर, प्रेम नारायण द्विवेदी। लखनऊ जंक्शन से नई दिल्ली के बीच पहली कॉरपोरेट एक्सप्रेस तेजस की सफलता से उत्साहित रेल मंत्रालय पूर्वोत्तर रेलवे में लगभग आधा दर्जन और निजी ट्रेनें चलाने की तैयारी में है। इनमें गोरखपुर, छपरा और मंडुआडीह से नई दिल्ली और मुंबई के लिए ट्रेनें चलेंगी। साथ ही वर्ष 2022-23 से देशभर में सौ निजी ट्रेनें चलाने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है।

अधिकारियों के बीच हो चुकी हैं कई बैठकें

रेलवे बोर्ड और जोनल स्तर के अधिकारियों तथा विशेषज्ञों के बीच लगातार गहन मंथन चल रहा है। रेल मंत्रालय और बोर्ड के उच्‍च पदस्थ अधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल कंपनियों से वार्ता कर रहे हैं। कई अहम मुद्दों पर सहमति भी बन चुकी है।

अति आधुनिक होगी पूरी ट्रेन

रेलवे के जानकार बताते हैं कि अब निजी ट्रेनों का संचलन इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कार्पोरेशन (आइआरसीटीसी) नहीं, बल्कि देश की नामी-गिरामी कंपनियां करेंगी। कुछ कंपनियों ने तैयारी भी शुरू कर दी है। पटरियां रेलवे की होंगी, कोच से लगायत संसाधन, उपकरण और कर्मचारी कंपनी के होंगे। पूरी ट्रेन अति आधुनिक होगी, बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। ट्रेनें लेट नहीं होंगी। स्वाभाविक है, ऐसे में यात्रियों को किराया भी अधिक देना होगा।

बढ़ जाएगा किराया

दरअसल, मंशा चाहे जो हो, रेलवे बोर्ड सीधा किराया नहीं बढ़ा सकता। ऐसे में मंत्रालय व बोर्ड के पास रेलवे को घाटे से उबारने और बेहतर सुविधाएं देने का एकमात्र यही विकल्प है। हालांकि, निजीकरण और निगमीकरण को लेकर कर्मचारी संगठनों का विरोध प्रदर्शन देशभर में जारी है। बोर्ड भी आश्वासन दे रहा है कि रेलवे निजी हाथों में नहीं जाएगा, लेकिन अंदर खिचड़ी कुछ और ही पक रही है।

निजी ट्रेनों के लिए रूट निर्धारित, आय-व्यय का आकलन शुरू

रेलवे अधिकारियों और निजी कंपनियों के बीच प्राथमिक चरण की बातचीत में कुछ प्रमुख रूटों का निर्धारण कर लिया गया है। कंपनियां निर्धारित रूटों पर ट्रेनों और यात्रियों की संख्या तथा आय-व्यय का आकलन कर रही हैं। निर्धारित रूटों पर गैप खोजकर प्राइवेट ट्रेनें चलाई जाएंगी। जरूरत पड़ी तो कम कमाई वाली ट्रेनों का संचलन बंद भी कर दिया जाएगा। इसके लिए सर्वे की संस्तुति मिल गई है।

Edited By: Pradeep Srivastava