गोरखपुर, जेएनएन। आर्थिक तंगी से जूझ रहे वित्त विहीन शिक्षकों और अंशकालिक प्रधानाचार्यो ने मानदेय निर्धारित करने के लिए आंदोलन की रणनीति पर विचार कर रहे हैं। इसके लिए बैठकें शुरू हो गई हैं। वक्ताओं ने कहा कि हमें अपनी मांगों के लिए सरकार तक आवाज पहुंचाने के लिए आंदोलन ही एक मात्र रास्ता है। इसलिए सभी लोगों को एकजुट होकर इसके लिए तैयार रहना होगा।
वित्त विहीन शिक्षकों की इसी संबंध में नौसढ़ स्थित आदर्श जनता इंटर कालेज में हुई बैठक में विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई। बैठक को संबोधित करते हुए प्रधानाचार्य गौरी शंकर यादव ने कहा कि वित्त विहीन स्कूलों में अंशकालिक प्रधानाचार्यो व शिक्षकों को 1987-88 से काम करते हुए लगभग तीस वर्ष हो रहे है। आज उनकी स्थिति यथावत है। न तो पद सृजन किया जा रहा है और ना तो उनकी सेवा को नियमित किया जा रहा है। न ही किसी तरह के मानदेय दिए जा रहे हैं। उनकी दशा किसी बंधुआ मजदूर से कम नहीं है। बैठक में वक्ताओं ने कहा कि 1986 में कांग्रेस सरकार ने वित्त का रोना रोते हुए वित्तविहीन व्यवस्था दो वर्ष के लिए लागू की। लेकिन दो वर्ष कौन कहे तीस वर्ष बीत गया और हम लोग दो चार हजार रुपये मासिक मानदेय पर शिक्षा विभाग का हर काम करते चले आ रहे है।
भाजपा से पहले की सपा सरकार के मुखिया अखिलेश यादव ने अपने कार्यकाल के अंतिम समय में एक हजार रुपये मासिक मानदेय दिलाना शुरू किया था, जो छह माह तक मिला। लेकिन वर्तमान भाजपा सरकार ने सत्ता पर बैठते ही उस मानदेय को बंद कर दिया। शिक्षकों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से वित्त विहीन शिक्षकों के मानदेय को पुन: लागू करने की मांग की है।
बैठक का संचालन दिनेश कुमार श्रीवास्तव ने किया। इस दौरान लल्लन यादव, इंद्रजीत पांडेय, रमाकांत पांडेय, हरिशंकर सिंह, रामकुमार निषाद, संजय मिश्रा, उदय प्रकाश यादव, सत्येंद्र श्रीवास्तव, श्रीमती कनकलता श्रीवास्तव, करुणेश पांडेय शैलेष मौर्या व दिलीप सिंह आदि उपस्थित थे।