गोरखपुर, उमेश पाठक। पिछले चुनावों में अपेक्षित सफलता न मिलने के बाद समीक्षा व संगठनात्मक बदलाव के प्रयोग में जुटी बहुजन समाज पार्टी को आने वाले पंचायत चुनावों के बहाने खूब तवज्जो मिल रही है। इन दिनों पार्टी के सम्मेलनों में हाथी का महावत बनने के लिए लोगों की लंबी कतार है। ग्रामीण क्षेत्रों में दखल के कारण पंचायत चुनावों में मजबूत आधार की उम्मीद से लोग पार्टी का दामन थाम रहे हैं।

बैठक में कम पड़ गईं कुर्सियां

समाजवादी पार्टी से गठबंधन के बावजूद लोकसभा चुनाव 2019 में अपेक्षित सफलता न मिलने के बाद बहुजन समाज पार्टी ने 'एकला चलो' की रणनीति अपना ली। पार्टी ने विधानसभा उपचुनाव भी अकेले ही लड़ा था लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। विधानसभा चुनाव 2022 के मद्देनजर संगठनात्मक रूप में पार्टी के भीतर कई बदलाव भी किए गए हैं। अधिक से अधिक लोगों को जोडऩे के लिए जिलाध्यक्ष के पद को सर्वसमाज के लिए खोल दिया गया है। पिछले दिनों गोरखपुर में आयोजित मंडलीय कार्यकर्ता सम्मेलन में भीड़ इस कदर बढ़ी कि कुर्सियां कम पड़ गईं। सम्मेलन में सैकड़ों लोगों ने पार्टी से नाता जोड़ा। इनमें कई ऐसे चेहरे थे, जो चुनाव की तैयारी में जुटे हैं।

विधान सभा स्‍तर पर हो चुकी हैं बैठकें

बीते 30 नवंबर को भी विधान सभा क्षेत्र स्तर पर बैठकें हुईं, जिनमें हर क्षेत्र से लोगों ने पार्टी की सदस्यता ली। इसके बाद भी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से संपर्क कर महावत बनने की कोशिशें जारी हैं। पार्टी नेतृत्व इस बात से उत्साहित जरूर है, लेकिन सोच-समझकर ही लोगों को पार्टी में शामिल किया जा रहा है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि कुछ महीने बाद पंचायत चुनाव होने हैं। पार्टी का आधार वोट मिल जाने के कारण जीत आसान हो जाती है, इसलिए पार्टी में लोगों के आने का सिलसिला बढ़ गया है। उन्होंने बताया कि शहरी क्षेत्र में पार्टी की उतनी दखल नहीं होती, इसलिए ज्वाइन करने वालों में इस क्षेत्र के लोगों की संख्या कम है।

बसपा की ओर लोग उम्मीद की नजर से देख रहे हैं। पार्टी की नीतियों से प्रभावित होकर लोग बड़े पैमाने पर पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर रहे हैं। - हरि प्रकाश निषाद, सेक्टर संयोजक, बसपा।

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