गोरखपुर, जागरण संवाददाता। Gorakhpur University Murder case: दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की छात्रा प्रियंका की मौत के मामले में रविवार दिन भर हाईवोल्टेज ड्रामा चला। पुलिस पहले मौत को आत्महत्या बताती रही। देर शाम कैंट थाना पुलिस ने विश्वविद्यालय के गृहविज्ञान विभाग की अध्यक्ष व उनके सहयोगियों के विरुद्ध हत्या का मुकदमा दर्ज किया है।

प्रियंका के पिता व गुलरिहा के शिवपुर साहबाजगंज पोखरा निवासी विनोद उनका कहना है कि उन्हें पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर भरोसा नहीं है। उनकी पुत्री की हत्या की गई है। प्रियंका के पिता विनोद सिक्योरिटी गार्ड का काम करते हैं। फंदे से लटकते समय उसका पांव जमीन को छू रहा था। कपड़े गंदे थे। सिर पर चोट के निशान थे। उसकी घड़ी गायब थी। चप्पल कुछ दूरी पर पड़ा था। उसने कहा कि यह आत्महत्या के लक्षण तो नहीं हैं। प्रियंका के स्वजन ने सुबह घर में शव रखकर दुबारा पोस्टमार्टम कराने की बात पर अड़े हैं। कांग्रेस जिलाध्यक्ष निर्मला पासवान, सामाजिक कार्यकर्ता विजय श्रीवास्तव, भाष्कर चौधरी, बादल चतुर्वेदी, सामाजिक कार्यकर्ता शांति भवानी सहित विभिन्न छात्र संगठनों के लोग उनके समर्थन में उतर गए हैं। गुलरिहा सहित करीब आधा दर्जन थानों की पुलिस मौके पर मौजूद है।

दिन भर मशक्कत करते रहे अधिकारी

अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व राजेश कुमार सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट अर्पित गुप्ता, प्रभारी एसएसपी/एसपी सिटी सोनम कुमार, एसपी नार्थ मनोज अवस्थी आदि शाम से ही प्रदर्शनकारियों को समझाने में जुटे रहे, लेकिन मृतका के स्वजन अंतिम संस्कार के लिए तैयार नहीं हुए। प्रियंका अपने चार भाई-बहन में सबसे छोटी थी। उसकी मां लीलावती का रो-रोकर बुरा हाल है।

पढ़ने में तेज थी प्रियंका

पिता विनोद का कहना है कि प्रियंका बचपन से पढ़ने में तेज थी। बीएसी प्रथम व द्वितीय वर्ष भी उसने अच्छे नंबरों के साथ उत्तीर्ण किया था। मृतका के भाई मनीष का कहना है कि इसमें विश्वविद्यालय प्रशासन की मिली भगत है। इतनी बड़ी घटना होने के बावजूद कोई विश्वविद्यालय प्रशासन से मौके पर नहीं आया।

मुकदमे की जानकारी नहीं

गृह विज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष प्रोफेसर दिव्यारानी का कहना है कि उन्हें एफआईआर के विषय में जानकारी नहीं है। इस मामले में उनका कोई रोल ही नहीं है।

Edited By: Pradeep Srivastava