गोरखपुर, जेएनएन: सिद्धार्थनगर जनपद में होम आइसोलेशन में जाने वाले कोरोना संक्रमितों की मुसीबत बढ़ती जा रही है। वजह महंगी आइसोलेशन किट व दवाएं। हाल के दिनों में मरीजों की बढ़ती तादाद के बाद मांग बढ़ने से इनकी कीमत पहले की तुलना में काफी बढ़ गई है। चूंकि इनका इंतजाम खुद मरीज को ही करना है, ऐसे में उनकी मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। कोरोना की शुरुआत से पहले डिजिटल थर्मामीटर, थर्मल स्कैनर, बीपी, शुगर और पल्स ऑक्सीमीटर के दाम कम थे। जैसे ही होम आइसोलेशन की प्रक्रिया शुरू की गई, कीमतों में फिर उछाल आया है। यह दोगुने से भी अधिक हैं। इसी तरह दूसरे उपकरणों के दाम भी बढ़ गए। ------------- दवाएं देने में मनमानी कोरोना संक्रमितों को किट के अनुसार दवाएं नहीं मिल रही हैं। मरीजों को पैरासिटामॉल, सिप्रोफ्लक्सासिन 500 एमजी दे रहे हैं। किट में दवाएं न मिलने से मरीज को छह से सात सौ रुपये अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है। होम आइसोलेशन एप के माध्यम से दवाएं ली जा सकती हैं, लेकिन मिलतीं नहीं। आइसोलेशन वार्ड में इलाज में जुटे चिकित्सकों का कहना है कि विटामिन सी और ¨जक 20 एमजी सुबह-शाम 14 दिन तक, पैरासिटामाल, एजिथ्रोमाइसिन 500 एमजी दिन में एक बार पांच दिन, पैनटॉप दिन में एक बार पांच दिन दिया जा रहा है। बिना लक्षण के मरीजों को कोई दवा नहीं दी जाती है। ----------------- जरूरी सामानों के यह हैं दाम पल्स ऑक्सीमीटर-900 से 1600 रुपये, बीपी मशीन 1600, शुगर मशीन- 500 से 1200, रुपये डिजिटल थर्मामीटर 150 से 400 रुपये, थर्मल स्कैनर-3000 से 4500 रुपये है। .... संक्रमित को किसी प्रकार की दिक्कत हो तो होम आइसोलेशन एप पर समस्या को फीड कर सकते हैं। उनकी समस्या ¨लक के जरिए विभाग तक पहुंच जाएगी। इसके पश्चात उनके पास आवश्यक दवाएं लेकर विभागीय टीम पहुंच जाएंगी। किट में अधिक दवा देने से इसके सेवन से मरीज को नुकसान होने का डर रहता है। इस कारण अधिक दवाएं नहीं दी जा रही हैं। जिले में इस वक्त 190 कोरोना संक्रमित होम आइसोलेट हैं। मरीजों को लक्षण के हिसाब से दवा देना होता है। मरीज की समस्या के हिसाब से दवा दी जा रही है। डॉ.आईबी विश्वकर्मा, सीएमओ

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