गोरखपुर, जेएनएन। काठमांडू में पुलिस के हत्थे चढ़ा नेपाल का मोस्टवांटेड नसीम बादशाह एक दशक पहले से बार्डर के सटे भारतीय क्षेत्र के अलिगढ़वा में अपना ठिकाना बनाया है, जिसे भारतीय पुलिस अपना मित्र बनाकर माननीय का दर्जा दे रखी थी। अलीगढ़वा में एसएसबी कैंप से महज पांच सौ मीटर दूर स्थित बादशाह के ठिकाने के बारे में सुरक्षा एजेंसियों को कैसे खबर नहीं लगी? यह सुरक्षा पर सवाल है। जो नेपाल में पाकिस्तानी एजेंट, फेंक करेंसी सहित आठ हत्याओं में वांछित चल रहा था, वह यहां के पीस कमेटी की बैठकों में कैसे भाग लेता रहा? इसका जवाब पुलिस के पास भी नहीं है।
खतरनाक अपराधी का भारत के अंदर पुलिस में दखल भारत के अंदर नसीम बादशाह की दखल बढ़ती जा रही थी। बड़े मामलों को चुटकी बजाकर हल निकाल लेना बादशाह की आदत में शुमार था, जिसके चलते पुलिस को भी बादशाह की बादशाहत रास आने लगी थी। वह इतना शातिर है कि यहां वह लोगों की मदद कर भारतीय सुरक्षा तंत्र और उसकी जानकारियां इकट्ठा करता था। बार्डर के इधर और उधर दोनों देशों के बड़े मामले निपटाने में बादशाह का नाम सामने आता है। मिर्जा दिलशाद बेग व परवेज टांडा के बाद नेपाल में नसीम की तूती नेपाल में खूंखार अपराधियों ने अपनी शरणस्थली बना रखी थी। मिर्जा दिलशाद बेग के बाद परवेज टांडा जैसे खतरनाक अपराधियों की कभी नेपाल में तूती बोलती थी। अब वही स्थिति नसीम बादशाह की है।
वह पाकिस्तानी एजेंट है और भारतीय जाली नोटों का सबसे बड़ा सप्लायर है। बार्डर इलाके में भारतीय क्षेत्र में स्थित मदरसों में उसकी शोहरत और सम्मान किसी से छिपा नहीं है। वह अपने खतरनाक इरादे को अंजाम देने के लिए भारतीय क्षेत्र में पुलिस मित्र था। यहीं से वह पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियो की कार्य प्रणाली के बारे में जानकारी लेता रहता था। पत्‍‌नी फौजिया भारत के अलीगढ़वा में लगाती थी दरबार जरायम दुनिया में अपनी धाक जमा चुके मिर्जा दिलशाद बेग और परवेज टांडा के बाद नसीम का नाम नेपाल में तेजी से उभरा। उसकी पत्नी फौजिया नसीम नेपाल में प्रदेश सभा की सदस्य हैं।
उसका परिवार सिद्धार्थनगर जिले के अलीगढ़वा में ही रहता है। जहां बंगले पर रोजाना दरबार लगता था। पुलिस कर्मी भी उसके यहां आते-जाते थे। घर पर हुई पंचायत के फैसले को पुलिस भी नहीं बदलती थी। पाकिस्तान भी जा चुका है नसीम बादशाह नसीम बादशाह पाकिस्तान व चीन का भी दौरा कर चुका है। सीमा पर उसके बढ़ते दखल को देखते हुए केंद्रीय खुफिया एजेंसियों के भी कान खड़े हो गए थे। तब वर्ष 2014 में केंद्रीय एजेंसियों ने उसकी लोकेशन तलाश करने के लिए जनपद पुलिस को निर्देशित भी किया था, लेकिन वह सब कुछ मैनेज कर ले गया।
नेपाल की निचली अदालत ने एक हत्या में नसीम को 117 वर्ष की कैद की सजा सुना चुकी है, जिसके बाद वह नेपाल से फरार होकर भारत में अपना ठिकाना बना लिया। बालू के धंधे में उतरने की थी तैयारी नसीम बादशाह बालू के धंधे में उतरने की तैयारी में था। हाल ही में नेपाल के एक रिसार्ट में संतकबीर नगर जिले के कुछ लोगों के साथ साझेदारी भी तय हुई थी। करोड़ों की डील के शुरुआती दौर में ही रुपयों के लेनदेन को लेकर विवाद हो गया। इसके बाद से ही वह चौकस हो गया था।
नेपाल की राजधानी काठमांडू में ही अधिकांश समय बिताने लगा था। जल्द ही विदेश जाने की तैयारी में लगा हुआ था, इसी बीच बीते शनिवार को नेपाल पुलिस ने उसे काठमांडू से गिरफ्तार कर लिया। जानकारी नहीं मिल पाई : कमांडेंट एसएसबी के कमांडेंट अमित ¨सह का कहना है कि नसीम बादशाह के बारे में जानकारी थी, उसपर नजर भी रखी जा रही थी। लेकिन उसकी गतिविधियां यहां कभी पकड़ में नहीं आई। कभी नेपाल पुलिस ने यह जानकारी नहीं दी थी कि नसीम नेपाल का फरारी बदमाश है।
पुलिस की बड़ी चूक
आइजी आइजी बस्ती रेंज आशुतोष कुमार का कहना है कि भारत के अपराधी नेपाल में तो नेपाल के अपराधियों का भारत में शरण लेने की जानकारी मिलती रहती है, लेकिन नेपाल का बड़ा अपराधी सिद्धार्थनगर में ठिकाना बनाए रखा, यह पुलिस की बहुत बड़ी चूक है। इस तरह की चूक न हो इसके लिए सर्तकता बरती जाएगी।

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