गोरखपुर, जेएनएन। महज 500 रुपये माहवार देकर एयरकंडीशनर का लुत्फ उठा रहे गोरखपुर विश्वविद्यालय के आवासियों के 'अच्छे दिन' नहीं रहे। विवि की आवासीय कॉलोनियों में अब मीटर से एसी चलेगा। हर महीने जितनी बिजली एसी चलाने में खर्च होगी, उसका पूरा भुगतान करना होगा। विश्वविद्यालय की विकास समिति ने इस बाबत बुधवार को फैसला लिया है। बुधवार को हुए निर्णय के बाद अब आवासीय कॉलोनियों में घर-घर मीटर लगाया जाएगा। एसी का अलग मीटर होगा, जबकि शेष बिजली खर्च मापने के लिए अलग मीटर लगाया जाएगा।
अब तक नियम था कि आवासों में एक एयरकंडीशनर कितनी भी बिजली क्यों न खर्च करे, भुगतान 500 रुपये माहवार ही करना है। दो एसी के लिए 1000 और तीन के लिए 1500 रुपये फिक्स था। गर्मियों में सामान्य तौर पर घरों के बिजली बिल का अधिकाश हिस्सा एसी का ही होता है, लेकिन यहा एयरकंडीशनर का बिजली बिल खर्च के हिसाब से नहीं वसूला जाता। जाहिर है, ऐसी व्यवस्थाओं से बिजली संचय को तो बढ़ावा मिलने से रहा, इसके उलट ओवरलोडिंग को तो बढ़ावा मिलता था। नहीं बन रही थी एक राय पिछले तीन वर्ष में तीन बार विकास समिति में बिजली बिल की दरों में बदलाव का प्रस्ताव रखा गया, लेकिन कभी भी निर्णय नहीं हो सका। यही नहीं एसी उपयोग के लिए नियम कड़े करने के प्रस्ताव पर भी एक राय नहीं बन रही थी।
दरअसल, उपभोक्ताओं का एक बड़ा वर्ग इस दर में कोई बदलाव नहीं चाहता था। हालाकि ऐसे उपभोक्ताओं भी थे जो बिजली खर्च के वास्तविक दर से भुगतान करने को तैयार हैं। अब बिजली बिल की दर पर होगा फैसला एसी के लिए मीटर लगाए जाने के बाद अब बारी बिजली बिल की दरों में बदलाव की है। 2013 के बाद अब तक उसमें बदलाव भी नहीं हो सका है। विश्वविद्यालय करीब 7.70 रुपये की दर से बिजली बिल का भुगतान विभाग को करता है, लेकिन अपने उपयोगकर्ताओं से महज 4.05 रुपये की दर से ही बिजली बिल लेता है।
इस सहूलियत को खत्म करने पर भी विश्वविद्यालय प्रशासन गंभीरता से विचार कर रहा है। सुधार की हो रही कोशिश गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. ओमप्रकाश का कहना है कि बिजली व्यवस्था में सुधार की हम कोशिश कर रहे हैं। विकास समिति ने एसी के लिए मीटर लगाया जाना अनिवार्य करने का निर्णय लिया है। उसकी के अनुरूप भुगतान करना होगा।