गोरखपुर, जेएनएन। रेलवे स्टेशन की पटरियों पर जान जोखिम में डालकर खाली पानी की बोतलें और प्लास्टिक की पन्नियां बटोरने वाली सपना अब सुबह उठकर स्कूल जाने को तैयार हो जाती है। स्टेशन परिसर के किसी कोने में बैठकर नशा करने वाला राजू गिनती और पहाड़ा के साथ एक सांस में एबीसीडी भी सुना देता है। अनुष्का अब ड्रेस में रहती है और वह अपना नाम भी लिख लेती है। बच्ची, आदित्य, पूजा, अली और प्रियंका जैसे दर्जनों बच्चे रोजाना रेलवे परिसर में स्थित अंत्योदय कल्याण केंद्र पहुंच जाते हैं। जहां उन्हें नाश्ता, भोजन के साथ निश्शुल्क शिक्षा मिलती है। ऐसे दर्जनों बच्चों का जीवन सुधार कर रेलवे उन्हें मुख्य धारा में ला रहा है।

 इन बच्चों ने कभी स्कूल का मुंह नहीं देखा था। उनके घर में नशे का माहौल है। कूड़ा बीनने पर ही उन्हें खाना मिलता था। पर रेलवे का अंत्योदय कल्याण केंद्र उनके जीवन को बदल रहा है। रेलवे के इंजीनियर, अधिकारी और कर्मचारी उनके खाने व पढऩे की व्यवस्था करते हैं। यांत्रिक विभाग के कार्यालय अधीक्षक चुन्ने बताते हैं कि स्मार्ट क्लास में बच्चे पढ़ते हैं। उन्हें रेलकर्मी, इंजीनियर्स और इस्माइल रोटी संस्था के लोग निश्शुल्क पढ़ाते हैं। सीनियर सेक्शन इंजीनियर रमेश पांडेय कहते हैं कि बच्चे बदल रहे हैं। अधिकतर ने नशा छोड़ दिया है। अपराध की दुनिया में बढ़ रहे कदम विद्या के मंदिर की तरफ चल पड़े हैं।

बच्चों के पास आधारकार्ड

रेलवे मंत्रालय के दिशा-निर्देश पर 12 दिसंबर 2017 को तत्कालीन प्रमुख मुख्य यांत्रिक इंजीनियर एके सिंह के मार्गदर्शन में परिसर स्थित एक कमरे में 'अंत्योदय कल्याण केंद्र' खोला गया। शुरुआत में तो दो से तीन बच्चे आते थे। वे पढ़ाई के नाम पर भाग जाते थे। लेकिन धीरे-धीरे जागरूकता बढ़ी। आज बच्चों की संख्या लगभग 30 तक पहुंच गई है। उनका आधार कार्ड भी बनवा दिया गया है।

रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष ने दिया पुरस्कार

पिछले वर्ष गोरखपुर आए तत्कालीन रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष ने अंत्योदय कल्याण केंद्र के लिए एक लाख रुपये का पुरस्कार दिया था।

अंत्योदय कल्याण केंद्र का हो रहा संचालन

पूर्वोत्‍तर रेलवे के सीपीआरओ संजय यादव ने कहा कि रेलवे बोर्ड के निर्देश पर अंत्योदय कल्याण केंद्र का संचालन किया जा रहा है। यह एक सकारात्मक पहल है। स्कूल नहीं जाने वाले बच्चों के जीवन में भी सुधार लाने और उन्हें समाज के मुख्य धारा में जोडऩे का प्रयास किया जा रहा है।

Posted By: Pradeep Srivastava

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