गोरखपुर (जेएनएन)। देश का भाग्यविधाता कहे जाना वाला किसान फसलों को लेकर अक्सर मुसीबत में ही फंसे रहता है। धान की फसल के साथ ही सब्जी की खेती के लिए किसान पानी के लिए मारा-मारा फिर रहा है। पाली ब्लाक में ¨सचाई का दारोमदार संभालने वाला बखिरा पंप कैनाल द्वितीय सूख गया है। कैनाल से निकली चार माइनरों में भी पानी का अकाल हो गया है, जिससे खेती पर असर पड़ने लगा है। किसानों की गुहार पर भी अफसरों ने चुप्पी साध ली है। यह बिडंबना ही है कि किसानों की फसलों को जब पानी की आवश्यकता रहती है तो नहरें सूखी रहती हैं।
वर्तमान में किसान तिलहन और दलहन की फसल के लिए पानी को लेकर परेशान हैं। वर्ष 1962 में बखिरा झील से लेकर सहजनवां तक लगभग 14 किमी बखिरा पंप कैनाल का निर्माण कराया गया। इसके अलावा इससे चार माइनर भी निकाली गई, जिससे किसानों को समय से पानी उपलब्ध हो सके। शासन ने बखिरा झील में तीन पंप भी लगाए है मगर एक को छोड़ बाकी बेकार पड़े हैं। शुरुआती दौर में किसानों को बखिरा पंप कैनाल से लाभ जरूर मिला मगर उसके बाद सफाई और देखरेख के अभाव में सब बेकार हो गया।
किसानों ने कहा
किसान राधे का कहना है कि अब तो कैनाल नहर सिर्फ कहने के लिए ही रह गई हैं। पानी कभी-कभार ही आता है। पहले पानी आता भी था मगर अब नहर के किनारे खेत होने के बाद भी इंजन से पानी चलाना पड़ रहा है। विजय का कहना है कि लगभग तीन वर्ष से एक ही पंप से अधिकारी पानी छोड़ने का प्रयास करते हैं। कभी-कभार पानी आया भी तो आधे कैनाल तक भी नहीं पहुंचा। पिछले वर्ष नहर कैनाल की सफाई कराई गई लेकिन पानी अब तक कभी भी टेल तक नहीं पहुंच सका है। सफाई के नाम पर अधिकारी सरकारी पैसे का गड़बड़झाला कर रहे हैं।
शीघ्र मिलेगा पानी : एसडीएम
इस संबंध में एसडीएम कमलेश चंद्र वाजपेयी ने कहा कि नहरों में जरूरत के समय पानी नहीं मिलना दुर्भाग्यपूर्ण है। डीएम और ¨सचाई विभाग के अधिकारियों को इसके लिए अवगत कराते हुए पत्र भेजा गया है। पानी छोड़ने की व्यवस्था की जा रही है।
यह है माइनर माइनर : लंबाई अलगटपुर माइनरएक किमी, रिठुआखोर माइनर 2.2 किमी, कोल्हुई माइनर  2.2 किमी, कुआबार माइनर - 6.99 किमी।