गोरखपुर, (हेमन्त पाठक)।

जिले में अवैध पैथालॉजी सेंटरों का जाल यूं ही नहीं फैलता जा रहा। वजह इन पर लगाम लगाने के लिए किसी ठोस नियम-कानून का न होना है। रिकार्ड आनलाइन न होना भी काफी हद तक जिम्मेदार है। अब तक विभाग यह भी निर्धारित नहीं कर सका है कि एक पैथालॉजिस्ट के नाम कितने सेंटर संचालित हो सकते हैं।

हालांकि यह काम बेहद आसान है। कई दूसरे विभाग ऐसा ही कर रहे हैं। दवा की दुकानों की बात करें तो पूरे प्रदेश का रिकार्ड आनलाइन है। ऐसे में यदि एक फार्मासिस्ट का पंजीकरण दो जगह होता है कि तो मामला आनलाइन फीडिंग के साथ ही पता चल जाता है।

खुद सीएमओ कार्यालय तक में अल्ट्रासाउंड सेंटरों का पूरा रिकार्ड आनलाइन होता है। एक-एक पंजीकृत सेंटर का पूरा नाम व ब्योरा उपलब्ध रहता है। सिर्फ एक क्लिक पर सारी जानकारी सामने आ जाती है। लेकिन, पैथालॉजी सेंटर जिनकी जांच रिपोर्ट के आधार पर ही डाक्टर इलाज करते हैं, मरीज के इलाज की दिशा व दशा तय होनी होती है, उनको लेकर कोई सख्त नियम-कानून नहीं है।

रिकार्ड आनलाइन न होने का नतीजा है कि सिर्फ किसी अवैध पैथॉलॉजी सेंटर का नाम सामने आने पर विभाग इस नतीजे पर नहीं पहुंच पाता है कि वह वैध है या अवैध। मौके पर जाकर कागजातों की जांच करनी पड़ती है, इसके बाद ही तय हो पाता है कि संबंधित सेंटर का पंजीकरण है या नहीं। डाक्टर साहब बाहर, तो कौन करता है जांच

पैथालॉजी सेंटरों में कई बार देखा जाता है कि जिस डाक्टर के नाम पर सेंटर पंजीकृत होता है, वह लंबे अवकाश पर चले जाते हैं। इसके बावजूद जांच जारी रहती है। शहर के कुछ प्रतिष्ठित सेंटर ही ऐसे हैं जहां सेंकेंड लाइन में भी पैथालॉजिस्ट होते हैं जो जांच के लिए अधिकृत होते हैं। लेकिन बड़ी तादाद में ऐसे सेंटर हैं जहां इसकी कोई व्यवस्था नहीं होती। चौंकाने वाली बात तो यह है कि इन सेंटरों में डाक्टरों की गैर मौजूदगी के दौरान भी जांच व रिपोर्ट देने का सिलसिला नहीं थमता। ऐसे में यहां कौन जांच कर रिपोर्ट देता है, यह बड़ा सवाल है। जितने जिम्मेदार उतनी राय

नियम निर्धारित नहीं : सीएमओ

सीएमओ डा. एसके तिवारी का कहना कि एक कहना सरकार की तरफ से इसको लेकर कोई नियम निर्धारित नहीं कि एक पैथालॉजिस्ट अधिकतम कितने सेंटर चला सकता है। लेकिन गोरखपुर में पंजीकरण के समय एक पैथालॉजिस्ट अधिक चाहता है तो उसे अधिकतम तीन सेंटर चलाने की अनुमति दी जाती है। इसमें यह देखा जाता है कि तीनों सेंटरों की आपस में कितनी दूरी है, सेंटरों पर जांच का लोड कितना है। पैथालॉजिस्ट की उम्र भी देखी जाती है इसके बाद यह आकलन किया जाता है कि वह जांच का काम सुचारु रूप से कर सकते हैं या नहीं। कोई गाइडलाइन नहीं : डा. मंगलेश

गोरखपुर पैथालॉजिस्ट एसोसिएशन के सचिव व वरिष्ठ पैथालॉजिस्ट डा. मंगलेश श्रीवास्तव का कहना कि उत्तर प्रदेश में इसको लेकर सरकार की तरफ से कोई गाइड लाइन नहीं है। अलग-अलग प्रदेशों में अलग-अलग नियम है। महाराष्ट्र में कानून है कि एक पैथालॉजिस्ट दो सेंटर संचालित कर सकता है। सिर्फ तीन सेंटरों पर हो सकती है जांच : डा. अमित

वरिष्ठ पैथालॉजिस्ट डा. अमित गोयल का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग कहने को तो एक पैथालॉजिस्ट को सिर्फ तीन सेंटरों पर जांच की अनुमति देता है पर सच यह है कि शहर में कई ऐसे पैथालॉजिस्ट हैं जिनके नाम तीन से अधिक सेंटरों पर चल रहे हैं। जांच हो तो यह बात पूरी तरह साफ हो जाएगी।

Posted By: Jagran