गोरखपुर/ सिद्धार्थनगर, ( जीतेन्द्र पांडेय)। सिद्धार्थनगर जनपद से सटी 68 किलोमीटर की नेपाल सीमा पर भारतीय नेपाली दारू पर झूम रहे हैं। यहां नेपाली शराब का प्रभाव इतना है कि तीन दशकों से इसने यहां भारतीय शराब के पांव नहीं जमने दिया। कभी कोई प्रयास हुआ भी तो वह नेपाली के कारोबार के आगे टिक नहीं सके। पिछले एक वर्ष में जिले में 12000 शीशी नेपाली शराब हुई है। दो दिन पूर्व भी एसएसबी व आबकारी टीम ने बढऩी में 100 पेटी नेपाली शराब बरामद किया। इतने बड़े पैमाने पर शराब बरामद हो रही है। इससे दो माह पूर्व दो सौ पेटी नेपाली शराब बरामद हुई थी। जाहिर एक दिन में नेटवर्क तैयार नहीं हुआ होगा। यहां बड़े पैमाने पर नेपाली शराब बरामद होने का तात्पर्य है कि सरहद पर कोई अंकुश नहीं लग सका है। एक अनुमान है कि नेपाली शराब की खपत के नाते माह में करीब 50 लाख के राजस्व का नुकसान होता है।
नेपाली शराब की सिद्धार्थनगर में बड़ी बरामदगी
गत 15 जुलाई को ढेबरुआ थाना क्षेत्र के बढऩी कस्बे के वार्ड छह में स्थित पोखरे के पास से एसएसबी व आबकारी विभाग की संयुक्त टीम ने छापेमारी कर 52 पेटी नेपाली शराब बरामद किया है। बरामद शराब को आबकारी विभाग ने जब्त कर पकड़ी गईं चार महिला तस्करों पर आबकारी एक्ट में केस दर्ज किया है।11 अक्टूबर को ढेबरुआ थाना क्षेत्र के बढऩी कस्बे में गुरुवार रात आबकारी व एसएसबी की संयुक्त टीम ने 100 पेटी नेपाली शराब बरामद किया। 3000 शीशी नेपाली शराब बरामद हुई।
एक दिन में नहीं पनपा कारोबार
सीमाई क्षेत्रों से सौ-सौ पेटी नेपाली शराब बरामद हो रही है। सीमाई क्षेत्रों में पहरा भले हो, पर भारतीय सीमा में बरामद शराब की खेप से यह स्पष्ट है कि कारोबारियों को विभाग व पुलिस का डर नहीं है। वह बेरोक-टोक जिले की सीमा में प्रवेश कर रहे हैं। यहां कारोबार कर रहे हैं।
राजस्व को लग रही बड़ी चपत
जिले में नेपाली शराब का कारोबार राजस्व को भी चपत लगा रहा है। बावजूद इसके न ही सुरक्षा एजेंसियां गंभीर दिखती हैं और न ही विभाग। जानकारों का मानना है कि कारोबार पर अंकुश लगे तो प्रतिवर्ष करीब छह करोड़ के राजस्व की वृद्धि होगी।
सीमाई इलाकों में धड़ल्‍ले से बिकती है नेपाली शराब
नेपाल से सटे सिद्धार्थनगर के अलावा महरजगंज में भी नेपाली शराब धड़ल्‍ले से बिकती है। सीमाई इलाकों के लोग तो शराब पीने के लिए नेपाल जाते हैं, वहां सस्‍ती शराब पीकर वापस लौटते हैं।
महराजगंज जनपद में  सीमा पर एसएसबी एवं पुलिस द्वारा पकड़ी गई नेपाली शराब
- 17 जुलाई को एसएसबी ने 310 शीशी नेपाली शराब बरामद किया।
- 23 जुलाई को एसएसबी एवं पुलिस ने 30 शीशी नेपाली शराब बरामद किया।
- 28 जुलाई को एसएसबी ने 190 शीशी नेपाली शराब बरामद किया।
- 17 अगस्त को एसएसबी एवं पुलिस ने 329 शीशी नेपाली शराब बरामद किया।
- 24 अगस्त को एसएसबी ने 60 शीशी नेपाली शराब बरामद किया।
- 25 अगस्त को एसएसबी एवं पुलिस ने 75 शीशी नेपाली शराब बरामद किया।
- 14 सितंबर को एसएसबी ने 525 शीशी नेपाली शराब पकड़ा था
- 22 सितंबर को एसएसबी एवं पुलिस ने 710 शीशी नेपाली शराब बरामद किया।
- सात अक्टूबर को एसएसबी ने 840 शीशी नेपाली शराब बरामद किया।
- 11 अक्टूबर को एसएसबी ने 240 शीशी नेपाली शराब बरामद किया था।
सस्ती पड़ती है नेपाली शराब
नेपाली देसी शराब भारतीय शराब की तुलना में सस्ती पड़ती है। नेपाली शराब 16 से 18 रुपये भारतीय दर पर प्रति शीशी पड़ती है, जबकि भारतीय देशी शराब 52 रुपये शीशी पड़ती है। इससे बड़े पैमाने पर नेपाली शराब की तस्करी होती है। यहां सीमाई क्षेत्र के अधिकांश नागरिक पीने के चक्कर ने गज भर की दूरी पर नेपाल निकल जाते हैं। इसका परिणाम है कि तीन दशकों में सीमाई क्षेत्र में देशी की कोई दुकान स्थापित ही न हो सकी।
कहां से होता है धंधा
नेपाली शराब से 1751 किमी पूरी नेपाल सीमा प्रभावित है। जिले में बढ़नी, खुनुवा, कोटिया, अलीगढ़वा, ककरहवा, हरीबंशपुर जैसे कस्बों के माध्यम से नेपाली शराब बाजार में उतारी जाती है।
विभाग ने बढ़ाई सक्रियता
सिद्धार्थनगर के जिला आबकारी अधिकारी आरपी सिंह ने कहा कि यह विभाग की सक्रियता है कि अवैध कारोबारियों को सीमाई क्षेत्र में प्रवेश करते ही पकड़ लिया जा रहा है। यहां तक कि पिछले दिनों साइकिल से तस्करी करने वाले लोगों को पकड़ा गया था। बड़े पैमाने पर नेपाली शराब बरामद हुई थी। विभागीय सक्रियता की देन है बड़े पैमाने पर बरामदगी। सीमाई क्षेत्रों में गतिशीलता भी बढ़ाई है। सूत्र विकसित किए गए हैं। इससे राजस्व भी बढ़ा है।

Posted By: Pradeep Srivastava