गोरखपुर, जागरण संवाददाता। शिक्षण प्रशिक्षण से जुड़े सभी पाठ्यक्रमों के संचालन को लेकर शिक्षण संस्थाओं की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। बीएड, एमएड और बीटीसी पाठ्यक्रम के संचालन को लेकर पर्सनल अप्रेजल रिपोर्ट (पार) से जूझ रहे संस्थानों के लिए अब चार वर्षीय बीएड पाठ्यक्रम शुरू करना भी अति मुश्किल होगा। नेशनल काउंसिल आफ टीचर्स एजुकेशन (एनसीटीई) ने नियम इतने कड़े कर दिए हैं, फिलहाल कालेज तो दूर गोरखपुर- बस्ती मंडल के विश्वविद्यालय भी इसकी मान्यता लेने की सक्षमता नहीं रखते। इसमें सबसे बड़ी अड़चन नैक मूल्यांकन है। नए नियम के मुताबिक नैक मूल्यांकन न कराने वाले संस्थान तो इस पाठ्यक्रम के लिए आवेदन ही नहीं कर सकेंगे।

एनसीटीई चार वर्षीय इंटीग्रेटेड टीचर एजुकेशन प्रोग्राम (आइटीईपी) की मान्यता देने जा रही है। यह पाठ्यक्रम 2023-24 से चार साल के इंटीग्रेटेड बीएड पाठ्यक्रम के रूप में संचालित होगा। पहले चरण में इसके लिए एनसीटीई ने केंद्रीय विश्वविद्यालय, डीम्ड विश्वविद्यालय, सरकारी बीएड कालेज और स्किल यूनिवर्सिटी को ही पाठ्यक्रम संचालन की अनुमति देने का फैसला किया है।

निजी कालेज दूसरे चरण में आवेदन कर सकेंगे। नैक मूल्यांकन की बाध्यता के साथ पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए संस्थानों का चयन 20 प्वाइंट के मानक पर होगा। इसके लिए संस्थानों को 30 तरह के कागजात एनसीटीई में प्रस्तुत करने होंगे। इसमें भूमि, भवन, एनओसी, सोसाइटी रजिस्ट्रेशन के साथ ही नैक मूल्यांकन प्रमाण-पत्र काे महत्व दिया गया है। नियम को कड़ा करने के पीछे एनसीटीई की मंशा शैक्षिक गुणवत्ता को बढ़ाना है।

ऐसे मिलेगा संस्थानों को प्वाइंट

  • नैक पर मिलने वाले प्वाइंट : ए प्लस-प्लस ग्रेड पर आठ, ए प्लस पर सात, ए पर छह, बी प्लस-प्लस पांच, बी प्लस पर चार और बी पर तीन प्वाइंट।
  • एनआइआरएफ रैंकिंग पर प्वाइंट : एक से 50 रैंक पर आठ प्वाइंट, 50 से 100 रैंक पर छह प्वाइंट, 100 से 200 पर चार प्वाइंट और 200 से 500 रैंक पर दो प्वाइंट मिलेंगे।
  • संस्थान की आयु पर मिलने वाले अंक : पांच से दस वर्ष तक के संचालन पर दो प्वाइंट और इससे अधिक पर चार प्वाइंट।

आठ सेमेस्टर का होगा पाठ्यक्रम

इंटीग्रेटेड टीचर एजुकेशन प्रोग्राम कोर्स चार साल का होगा। इसमें आठ सेमेस्टर में होंगे। इसमें क्षेत्र का अनुभव, शिक्षण अभ्यास और इंटर्नशिप शामिल होगा। यह कोर्स प्राइमरी से लेकर सेकेंडरी तक के स्कूलों में इस पाठ्यक्रम को पूरा करने वाले विद्यार्थी पढ़ा सकेंगे।

Edited By: Pragati Chand