गोरखपुर, जेएनएन। गोरखपुर के मुकुंद शुक्ला ISRO के महत्वपूर्ण मिशन PSLV-C47 व Cartoset-3 के प्रक्षेपण के गवाह बने हैं। वे सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र शार, श्री हरिकोटा आंध्र प्रदेश में बतौर टेक्नीशियन प्रशिक्षु जून, 2019 से कार्यरत हैं।

प्रक्षेपण के समय रहे मौजूद

इस केंद्र से बुधवार को कार्टोसेट तीन का प्रक्षेपण किया गया तो मुकुंद वहां मौजूद रहे। उन्होंने इस नजारे को देखा। जून में ही वह एक वर्ष के लिए बतौर टेक्नीशियन प्रशिक्षु वहां गए हैं। मुकुंद चंद्रयान दो के भी गवाह बन चुके हैं। बातचीत में मुकुंद ने बताया कि वहां उन्हें बहुत कुछ सीखने को मिला है। प्रक्षेपण के समय वहां मौजूद होना गर्व की बात है। भारत को विश्व गुरु बनाने में आने वाले दिनों में इसरो का रोल अहम होगा। उन्होंने बताया कि जैसे-जैसे प्रक्षेपण का समय नजदीक आ रहा था, उल्टी गिनती चल रही थी।

कभी नहीं भूलेगा वह पल

सुबह 9.28 पर प्रक्षेपण हुआ तो सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र शार के एमआर कुरुप आडोटोरियम व ब्रह्म प्रकाश हाल मे बैठे सभी लोगों के तालियों की गडग़ड़ाहट से पूरा वातावरण गूंज उठा। भारत की सीमा सुरक्षा में इसका महत्वपूर्ण योगदान होगा। उन्होंने बताया कि इस प्रक्षेपण को अपनी आंखों से देखना भी कभी नही भूलने वाला होगा, क्योंकि ये भारत को महाशक्तिशाली बनाने वाला प्रक्षेपण था।

कार्टोसैट सीरीज का नौवां सैटेलाइट

कार्टोसेट तीन के बारे में बताते हुए कहा कि यह कार्टोसैट सीरीज का नौवां सैटेलाइट होगा। कार्टोसेट-3 का कैमरा इतना ताकतवर है कि वह अंतरिक्ष से जमीन पर एक फीट से भी कम (9.84 इंच) की ऊंचाई तक की तस्वीर ले सकेगा, यानी आप की कलाई पर बंधी घड़ी पर दिख रहे सही समय की भी सटीक जानकारी देगा। पाकिस्तान पर हुए सर्जिकल और एयर स्ट्राइक पर कार्टोसेट उपग्रहों की मदद ली गई थी।

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