गोरखपुर, जागरण संवाददाता। चौरीचौरा के विश्वम्भरपुर से अपहृत हुआ ग्रामवासी धीरेंद्र गौंड़ का चार वर्षीय पुत्र अंशु को लखनऊ में अपनी मां के पास मिला। उसने अपने साथी रामू कन्नौजिया निवासी घरमौली हाटा कुशीनगर के जरिये बेटे का अपहरण कराया था।

यह है मामला

बीते बुधवार को धीरेंद्र ने चौरीचौरा थाने में तहरीर देकर बताया था कि उसका पुत्र अंशु घर के बाहर खेल रहा था। थोड़ी देर बाद उन्होंने देखा कि उनका पुत्र वहां से गायब है। धीरेंद्र ने बताया कि उनकी पत्नी उनके साथ नहीं रहती है। वह अपने साथी रामू के साथ रहती है। घटना के बाद से रामू व उसकी गायब थे। धीरेंद्र की तहरीर पर पुलिस रामू के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर उसकी तलाश में जुटी थी। दोपहर बाद लखनऊ में अंशू अपनी मां के पास मिला। उसके साथ रामू भी मौजूद था।

पुलिस ने अंशु की मां व रामू को हिरासत में ले लिया। पुलिस तीनों को साथ लेकर रात में लखनऊ से चौरीचौरा लेते आई। चौरीचौरा सीओ जगतराम कन्नौजिया का कहना है कि रामू व अंशु की मां को हिरासत में लिया गया है। उनसे पूछताछ के बाद स्पष्ट होगा कि बच्‍चे का अपहरण कैसे हुआ था।

बीटेक में फेल होने के डर से भागा युवक तीन साल बाद मिला

पिपराइच का रहने वाला बीटेक छात्र फेल होने के डर से 34 माह पहले घर छोड़कर गुजरात के राजकोट चला गया था। जहां पर वह पिज्जा की दुकान पर काम कर रहा था। सर्विलांस की मदद से कैंट पुलिस ने उसे बरामद कर लिया। दारोगा व सिपाही उसे राजकोट से गोरखपुर ले आए। जांच में सुराग न मिलने पर पुलिस ने अपहरण के मुकदमे में फाइनल रिपोर्ट लगा दिया था। एसएसपी के आदेश पर मामले में दोबारा जांच की गई।जिसमें पता चला कि युवक राजकोट में है।

एसपी सिटी सोनम कुमार ने बताया क‍ि पिपराइच थाना क्षेत्र के हेमधापुर निवासी संदीप कुमार कन्नौजिया ने एसएसपी को प्रार्थना पत्र देकर बताया था कि बीटेक की पढ़ाई कर रहा उसका भाई मंजीत 2018 में लापता हो गया था। पिता की तहरीर पर कैंट पुलिस ने 24 दिसंबर 2018 को अपहरण का केस दर्ज किया। लेकिन साक्ष्य न मिलने की जानकारी देते हुए 20 अप्रैल 2020 को विवेचक ने फाइनल रिपोर्ट लगा कर फाइल को बंद कर दी थी। एसएसपी के आदेश पर कैंट पुलिस ने मामले की जांच फिर से शुरू की।

सर्विलांस की मदद से छानबीन करने पर पता चला कि मंजीत के आधार कार्ड पर गुजरात के राजकोट में सिमकार्ड लिया गया है। सूचना के आधार पर प्रभारी निरीक्षक कैंट सुधीर स‍िंह अपनी टीम के साथ गुजरात के राजकोट पहुंचे। वहां बिग बाजार के पास स्थित पिज्जा हट से मंजीत को बरामद कर लिया। मंजीत न बताया कि फेल होने के डर से वह घरवालों को बिना बताए गुजरात चला गया था। पिज्जा हट में काम करने के बदले उसे आठ हजार रुपये रुपये प्रतिमाह मिलते थे। इस दौरान एक बार भी उसने अपने स्वजन से बातचीत नहीं किया।

Edited By: Pradeep Srivastava