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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 04, 2019 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

आसान नहीं था इंसेफ्लाइटिस के प्रकोप से जंग जीतना, कारगर साबित हुआ यह नारा Gorakhpur News

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Published: Wed, 04 Sep 2019 10:15 AM (IST)Updated: Wed, 04 Sep 2019 10:32 AM (IST)

कुशीनगर जनपद में इंसेफ्लाइटिस ने कहर बरपा रखा था। बच्चे बेसमय काल के गाल में समा जा रहा थे।

आसान नहीं था इंसेफ्लाइटिस के प्रकोप से जंग जीतना, कारगर साबित हुआ यह नारा Gorakhpur News
आसान नहीं था इंसेफ्लाइटिस के प्रकोप से जंग जीतना, कारगर साबित हुआ यह नारा Gorakhpur News

गोरखपुर, जेएनएन। इंसेफ्लाइटिस को लेकर पूरी तरह बदनाम हो चुके कुशीनगर में इस जंग पर काबू पाना आसान नहीं था। जनपद का कोई क्षेत्र ऐसा नहीं था जहां के बच्चे, युवा इस बीमारी की चपेट में आकर असमय काल के गाल में न समा जाते हों। अस्पताल में भर्ती होने और दम तोड़ने वालों की संख्या सैकड़ों में होती थी। किसी की गोद सूनी होती थी, तो किसी का सुहाग उजड़ता था, यही नहीं कोई बेसंतान हो जाता था, लेकिन इन दो वर्षों में शासन-प्रशासन के उठाए गए कदमों से न सिर्फ मौतों की संख्या कम हुई, बल्कि अस्पताल में भर्ती और मेडिकल कालेज रेफर होने वाले मरीजों की संख्या में भी अप्रत्याशित कमी आयी है।
सबसे बड़ा कारगर हथियार इंसेफ्लाइटिस से जंग, जब सब होंगे संग, का नारा साबित हुआ। लोगों ने इस नारे का अर्थ समझा और प्रशासन के समय-समय पर चलाए गए स्वच्छता जागरूकता अभियान में अपनी भागीदारी निभाते गए। प्रशासन की इससे निपटने की योजनाबद्ध रणनीति रामबाण साबित हुई। पूरे जनपद में कार्यक्रम तय कर आम नागरिकों व प्रधानों की सहयोग से एक-एक गांव में स्वच्छता अभियान चलाया। युवकों ने श्रमदान किया। इसका असर यह है कि सफाई के प्रति लोग जागरूक हुए और अब सफाई पर ध्यान दे रहे हैं।
जागरूकता गोष्ठियों में भी इसके रोकथाम पर बल दिया गया। वहीं दूसरी ओर मच्छरों के खात्मे के लिए जलजमाव स्थलों पर एंटी लार्वा का छिड़काव किया गया। प्रशासन के सुझाव पर लोगों ने घर के आसपास जलजमाव स्थलों, नालियों में डीजल अथवा मिट्टी का तेल डालना शुरू किया। --- यहां-यहां हुई काउंस¨लग -जिले के दुदही, तमकुहीराज, सेवरही, विशुनपुरा, कसया, फाजिलनगर विकास खंड के गांवों में जाकर चिकित्सकों की टीम ने ग्रामीणों की काउंस¨लग की, तो बीमारी के प्रारंभिक लक्षण व उपचार के बारे में बताया। सर्वाधिक महत्वपूर्ण भूमिका आशा, एएनएम व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की रही, जिन्होंने पिछले साल शुरू हुए दस्तक व संचारी रोग अभियान के तहत घर-घर उपस्थिति दर्ज कराकर बुखार होने पर पीड़ितों को अस्पताल पहुंचाने तक का काम किया। टीकाकरण के साथ जागरूक करने का प्रयास भी सार्थक हुआ है।
यह की गई कार्रवाई
-वर्ष 2019 में 86125, वहीं वर्ष 2018 में 93425 टीकाकरण किया गया।
एंबुलेस की सुविधा
दो वर्षों में 12 एंबुलेंस की खरीदारी की गयी। इसका असर यह रहा कि बीमार लोगों को इलाज आसानी से होने लगी। जनपद में कुल 14 सामुदायिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के लिए कुल 75 एंबुलेंस हैं, जिसमें 108 नंबर की एंबुलेंस की सुविधा आबादी वाले क्षेत्रों में 34 है, जो चल रही हैं। इसके अलावा 37 एंबुलेंस 102 व एएलएस के चार एंबुलेंस लगाए गए हैं। जो इमरजेंसी हालत में जेईएस-एईएस मरीजों को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाते हैं।
जागरूकता के लिए बांटे गए पंफलेट
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत पंफलेट पर नवकी बीमारी (एईएस/जेई) के लक्षण से लेकर बचाव तक दी गई जानकारी दी जा रही है। इसके लिए गोष्ठी व जागरूकता रैली में लगभग डेढ़ लाख पंफलेट बंटवाए गए हैं।
यह हुए आयोजन
कार्यक्रम वर्ष 2019 2018
स्कूल रैली 4060 4120
प्रभात फेरी 1049 1049
गोष्ठी 322 427
अस्पतालों पर दी जा रही यह सुविधा -जिला संयुक्त चिकित्सालय में 10 बेड का एईएस/जेई वार्ड, तो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर चार बेड का बच्चों के लिए सघन चिकित्सा केंद्र उपलब्ध है। पीएचसी, सीएचसी पर दवा व इलाज का इंतजाम होने से अब लोगों का प्राथमिक इलाज संभव हो पा रहा है। रेयर केस में ही लोग अब जिला अस्पताल रेफर किए जा रहे हैं।
दिखा परिणाम
वर्ष-भर्ती मरीज-मरे
2016-1029-121
2017 883 126
2018 307 37
2019 (अब तक)100 6
इंसेफ्लाइटिस को लेकर जनपद में विभिन्न योजनाओं के माध्यम से लोगों को जागरूक करने का कार्य किया जा रहा है। एएनएम, आशा व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ 10 विभागों के अधिकारियों के सामूहिक प्रयास सार्थक हैं, जिससे काफी कुछ नियंत्रित कर लिया गया है। शीघ्र ही यह समस्या पूरी तरह खत्म हो जाएगी। - डॉ. हरिचरण सिंह, मुख्य चिकित्साधिकारी कुशीनगर