गोरखपुर, जेएनएन। डेंगू के मामले लगातार सामने आने को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने महानगर में डेंगू मच्छर के लार्वा की जांच की। कुल 5302 घरों में जांच की गई। सबसे ज्यादा लार्वा घरों में रखे कूलर में जमा साफ पानी में मिले हैं। इसके अलावा फ्रीज की ट्रे, सीमेंट की टंकी, प्लास्टिक के कंटेनर व गमलों में भी लार्वा पाए गए। जगह-जगह मैदान व सड़कों के किनारे फेंके टूटे-फूटे बर्तनों, टायरों में जमा पानी भी डेंगू मच्छर के लार्वा मिले हैं।

डेंगू के मच्छर सिर्फ साफ और स्थिर पानी में

सीएमओ डॉ. श्रीकांत तिवारी ने बताया कि जहां भी डेंगू मच्छर के लार्वा मिले, वहां एंटी लार्वा का छिड़काव कराया गया, साफ-सफाई कराई गई। लोगों से अपील की गई कि अपने घरों के आसपास पानी जमा न होने दें। डेंगू की रोकथाम में नगर निगम, पंचायती राज विभाग और स्वास्थ्य विभाग से अधिक महत्वपूर्ण सामान्य जन का प्रयास है। डेंगू का मच्छर गंदगी में नहीं बल्कि साफ और स्थिर पानी में पनपता है। ऐसे में घरों के भीतर ऐसे स्थान की सफाई कर दें जहां साफ और स्थिर पानी जमा है ताकि बीमारी को फैलने से रोका जा सके। 

2016 में सबसे अधिक मामले

सबसे अधिक डेंगू के मामले वर्ष 2016 में सामने आए थे। जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. एके पांडेय के अनुसार संदिग्ध डेंगू के कुल 1105 मामले रिपोर्ट हुए थे जिनमें से 168 में डेंगू पुष्ट हुआ था। इस वर्ष अभी तक 326 संदिग्ध मामले रिपोर्ट हुए हैं जिनमें से 59 में डेंगू की पुष्टि हो चुकी है। जुलाई से सितंबर तक डेंगू के सिर्फ 11 मामले पुष्ट हुए थे। अक्टूबर में 39 व नवंबर में अभी तक नौ मामलों में डेंगू की पुष्टि हो चुकी है। वर्ष 2017 में डेंगू के 11 मामले जबकि 2018 में 25 मामले पुष्ट हुए थे।

डेंगू के लक्षण

डेंगू होने पर मरीज को तत्‍काल डाक्‍टर के संपर्क में आ जाना चाहिए। इसके ल्रक्षणों में त्वचा पर चकत्ते, तेज सिर दर्द, पीठ दर्द, आंखों में दर्द, तेज बुखार, हड्डियों में दर्द, मसूढ़ों से खून बहना, नाक से खून बहना, जोड़ों में दर्द और उल्‍टी-दस्‍त होना है।

Posted By: Satish Shukla

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