गोरखपुर, जागरण संवाददाता। गोरखपुर जिले के तीन केंद्रों पर मेहरबानी दिखाकर 70 टन डीएपी आवंटित करने वालों ने अधिकारियों को भी गुमराह कर दिया। किसी को भी इस धांधली की भनक नहीं लग पाई। जागरण में खबर प्रकाशित होने के बाद छानबीन शुरू हुई तो पता चला कि जिम्मेदारों ने समिति के अध्यक्ष जिलाधिकारी को भी इस बारे में नहीं बताया था। जिलाधिकारी इस पूरे मामले की जांच करा रहे हैं। इसको लेकर कृषि विभाग में हड़कंप मचा है।

यह है नियम

बता दें कि रैक आने के बाद आवंटन समिति अध्यक्ष की अध्यक्षता में बैठक होती है। इसमें छह सदस्यीय समिति सहायक आयुक्त व सहायक निबन्धक सहकारिता, सचिव, महाप्रबंधक जिला सहकारी बैंक, जिला प्रबंधक पीसीएफ, मुख्य क्षेत्र प्रबंधक इफको, जिला गन्ना अधिकारी, जिला कृषि अधिकारी बकायदा बैठक में जिले में संचालित सहकारी समितियों, इफकों से संचालित आईएफएफडीसी, कृभकों समेत अन्य केंद्रों की मांग पर विचार करती है। फिर सभी सदस्य उन केंद्रों पर आवक के अनुसार डीएपी व अन्य का आवंटन करते हैं। इसके बाद उस आवंटन की प्रस्तुति अध्यक्ष के सामने प्रस्तुत होती है। जिस पर सभी सदस्य अपनी सहमति जताते हैं। इसके बाद अध्यक्ष अनुमोदन करते हैं। मगर इस बार हुए आवंटन को देखकर लग रहा है कि कोई बैठक नहीं हुई।

यह है मामला

25 नंवबर की भोर में पहुंची 2010 टन डीएपी और एनपीकेएस की रैक में डीएपी की 1070 टन रही। इसमें 985 टन सहकारी समितियों को और 70 टन इफकों से संचालित आईएफएफडीसी केंद्र को दिया। शेष 15 टन पीसीएफ कृषक सेवा केंद्र को दिया गया। इसमें से 985 टन डीएपी कुछ को छोड़कर 107 समितियों में भेजी गई। जिसमें कई समितियों पर अधिक मात्रा भेजा गया। वहीं इफकों को मिले 70 टन डीएपी में आईएफएफडीसी के तीन केंद्र को ही दे दिया। अन्य 69 केंद्रों पर एनपीकेएस भेजा गया। इसकों लेकर अन्य केंद्रों ने सवाल भी उठाया था। हालांकि इस मामले में जिला कृषि अधिकारी देवेन्द्र प्रताप सिंह ने इफकों को निर्देश देते हुए आगे से आने वाले रैक में से तीनों केंद्रों पर डीएपी और यूरिया देने पर रोक लगा दी है।

क्या कहते हैं जिला अधिकारी

जिलाधिकारी कृष्णा करुणेश ने बताया कि सिर्फ तीन केंद्रों पर डीएपी के आवंटन का मामला संज्ञान में आया है। आवंटन के मामले की जांच कराई जाएगी। इसमें जो भी दोषी मिलेंगे। उनके खिलाफ सख्ती कार्रवाई की जाएगी।

Edited By: Pragati Chand

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