गोरखपुर, जेएनएन। नई शिक्षा नीति के प्रचार-प्रसार को लेकर विश्वविद्यालय व महाविद्यालयों में जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित होंगे। इसका उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों तक नई शिक्षा नीति के बारे में जानकारी देना है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने इसको लेकर सभी कुलपतियों व महाविद्यालय के प्राचार्यों को निर्देश दिए हैं। आयोग ने कहा है कि नई शिक्षा नीति को लोगों तक पहुंचाने के लिए शिक्षक, छात्र, अधिकारी और उ'च शिक्षा से जुड़े सभी व्यक्ति वेबिनार और दूसरी ऑनलाइन गतिविधियां आयोजित करने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफार्म का इस्तेमाल कर सकते हैं। 

निगरानी पोर्टल से गतिविधियों पर नजर रखेगा आयोग

यूजीसी ने नई शिक्षा नीति को लेकर होने वाली गतिविधियों पर नजर रखने के लिए विश्वविद्यालय गतिविधि निगरानी पोर्टल बनाया है। इस पोर्टल के जरिये विश्वविद्यालय व महाविद्यालय इन गतिविधियों, मसलन वेबिनार व संगोष्ठी आदि को आयोग को साझा करेंगे।

ऑनलाइन प्लेटफार्म पर संचालित होंगी सभी गतिविधियां

दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विजयकृष्ण सिंह का कहना है कि नई शिक्षा नीति के प्रचार-प्रसार को लेकर यूजीसी का निर्देश प्राप्त हुआ है। इसके तहत जागरूकता कार्यक्रम से संबंधित गतिविधियां ऑनलाइन आयोजित की जाएगी। आयोग के निर्देश का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित कराया जाएगा।

प्री-पीएचडी प्रोन्नत पर विश्वविद्यालय मौन, शोधार्थी परेशान

अंतिम वर्ष की परीक्षाओं व अन्य शैक्षिक गतिविधियों को पटरी पर लाने की कवायद तो शुरू हो गई, लेकिन अभी भी प्री-पीएचडी की प्रोन्नत पर गोरखपुर विश्वविद्यालय प्रशासन के मौन होने से शोध छात्र-छात्राओं की परेशानियां बढ़ गईं हैं। छात्र विवि प्रशासन से कई बाद इसको कोई ठोस निर्णय लेने की मांग कर चुके हैं, लेकिन नतीजा सिफर है।

लगभग सात साल बाद फरवरी 2019 में रेट की शोध पात्रता परीक्षा गोरखपुर विश्वविद्यालय में करायी गई थी। परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों का साक्षात्कार के बाद प्री-पीएचडी में पंजीकरण कराया गया था। तकरीबन 23 विभागों में 1500 से अधिक शोधार्थी प्री- पीएचडी  कोर्स वर्क की कक्षाओं में शामिल हुए। नियमानुसार यह कोर्स छह माह में खत्म हो जाना चाहिए था, लेकिन विश्वविद्यालय की सुस्ती की वजह से कुछ विभागों में कोर्स वर्क में देरी हुई और धीरे-धीरे मार्च 2020 आ गया। विद्या परिषद की बैठक में कुलपति ने संकायों से प्री-पीएचडी कंप्यूटर क्लास एवं परीक्षा पर स्पष्टीकरण मांगा था, लेकिन प्रभारियों पर इसका कोई असर नहीं हुआ। कोरोना संकट के बाद प्रदेश के समस्त विश्वविद्यालयों ने अंतिम वर्ष /अंतिम सेमेस्टर के अलावा समस्त कक्षाओं के छात्रों को किसी न किसी आधार पर प्रोन्नत दे दिया गया। जिसके अनुपालन में गोरखपुर विवि ने भी समान निर्णय लिया, लेकिन प्री-पीएचडी को अलग छोड़ दिया। छात्रनेता अनिल दूबे ने कहा कि विश्वविद्यालय का शोधार्थियों के प्रति यह रवैया ङ्क्षचताजनक और दुर्भाग्यूर्ण है। शोधार्थी दिलीप ने कहा कि यदि छह माह का कोर्स वर्षों में होगा तो पीएचडी करने में दशक लग जाएगा। शोधार्थी शैलेश ने कहा कि इस मूल्यवान समय को बर्बाद करने से शोधार्थियों की व्यक्तिगत क्षति हुई है।

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