गोरखपुर, जागरण संवाददाता। Manish Gupta Murder Case मनीष हत्याकांड के पांच आरोपितों को गिरफ्तार कर घटना का सच तलाशने में जुटी एसआइटी को अभी इस बात का जवाब नहीं मिला है कि ऐसी कौन सी जांच थी, जिसे छह मिनट में ही पूरी कर जेएन एंड कंपनी कमरे से बाहर आ गई। सीसीटीवी फुटेज के मुताबिक 27-28 सितंबर की रात 12:05 पर कमरे में दाखिल होती दिखी पुलिस 12:11 पर मनीष को अचेत हालत में लेकर बाहर निकली थी। सवाल उठ रहा है कि क्या कमरे में घुसते ही सभी पुलिस कर्मी एक साथ मनीष पर टूट पड़े थे, जिससे कि वह दो से तीन मिनट में ही अचेत हो गए। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मनीष के चेहरे, सिर, आंख के पास, पेट में व हाथ की कोहनी में मिले घाव के उनके साथ हुई बर्बरता की गवाही दे रहे हैं।

सीसीटीवी फुटेज में पुलिस के आने-जाने का समय देखकर उठ रहे सवाल

एसआइटी (विशेष जांच दल) की जांच पूरी हो चुकी है, लेकिन अभी भी इस सवाल का जवाब उसके पास नहीं है कि कृष्णा पैलेस के रूम नंबर 512 में 27 सितंबर की रात बर्बरता की हद क्या थी। मनीष को सिर्फ एक पुलिस कर्मी ने मारा था या सभी पुलिस कर्मी एक साथ टूट पड़े थे, लेकिन सीसीटीवी फुटेज में कमरे से पुलिस के अंदर आने व बाहर जाने के समय व पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दर्ज चोटों पर एक साथ गौर किया जाए तो उससे संकेत यही मिल रहे हैं कि कमरे में मनीष पर एक साथ कई पुलिस वाले टूट पड़े थे।

12.05 पर दाखिल हुई थी पुलिस, 12.11 पर मनीष को अचेत हालत में लेकर बाहर निकली

घटना की रात होटल के सीसीटीवी फुटेज में नजर आ रहा है कि पुलिस रात में करीब 12.05 पर होटल के कमरे में गई थी। रात में 12.11 पर पुलिस मनीष को अचेतावस्था में लेकर होटल के कमरे से बाहर निकलती देखी जा रही है। छह मिनट के भीतर पुलिस ने मनीष के दोस्तों की आइडी चेक की। उनके बैग देखे। इस दौरान मनीष ने अपने भांजे के दोस्त दुर्गेश को फोन भी किया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से यह साबित है कि मनीष की पिटाई हुई थी। दो से तीन मिनट में पिटाई और मनीष के शरीर पर मौजूद चोटों का तात्पर्य है कि उन पर एक साथ सभी पुलिस कर्मी टूट पड़े थे।

Edited By: Pradeep Srivastava