रिस्क अलाउंस में बदलाव की तैयारी: किस कर्मचारी की नौकरी है कितनी खतरनाक, पूरा हिसाब बनाएगा रेलवे बोर्ड
रेलवे बोर्ड आठवें वेतन आयोग के लिए कर्मचारियों के जोखिम और कठिनाई का वैज्ञानिक आकलन करने हेतु डेटा जुटा रहा है।

प्रतीकात्मक तस्वीर
HighLights
रेलवे बोर्ड आठवें वेतन आयोग हेतु जोखिम डेटा जुटा रहा है।
कर्मचारियों के जोखिम, कठिनाई भत्तों का होगा वैज्ञानिक आकलन।
एआईआरएफ ने भत्तों के एरियर और 5-यूनिट वेतन की मांग।
प्रेम नारायण द्विवेदी, गोरखपुर। रेलवे में कौन कर्मचारी रोज सबसे ज्यादा जान जोखिम में डालकर काम करता है? किस विभाग में ड्यूटी के दौरान सबसे अधिक मौतें और गंभीर हादसे होते हैं? किन कर्मचारियों को भीषण गर्मी, कड़ाके की ठंड, मूसलधार बारिश, घने कोहरे में रातभर ट्रैक पर काम करना पड़ता है? किन रेलकर्मियों को चलती ट्रेनों के बीच पटरियों की मरम्मत करनी पड़ती है, तो कौन सुरंगों, पुलों, जंगलों और दुर्गम इलाकों में दिन-रात तैनात रहता है?
इन सभी सवालों का जवाब अब रेलवे बोर्ड जुटा रहा है। इन्हीं आंकड़ों के आधार पर आठवें वेतन आयोग में विभिन्न श्रेणियों के कर्मचारियों के जोखिम (रिस्क) और कठिनाई (हार्डशिप) का वैज्ञानिक आकलन कर जोखिम भत्ता, कठिनाई भत्ता, रात्रि ड्यूटी भत्ता, सुरक्षा सुविधाएं, स्वास्थ्य लाभ और अन्य सेवा सुविधाओं में बदलाव पर विचार किया जाएगा।
यही वजह है कि रेलवे बोर्ड ने देशभर के सभी जोन, उत्पादन इकाइयों और प्रशिक्षण संस्थानों से वर्ष 2024-25 के दौरान ड्यूटी के दौरान हुई मौतों, गंभीर चोटों, कार्य परिस्थितियों और विभागवार जोखिम से जुड़े विस्तृत आंकड़े तलब किए हैं।
रेलवे बोर्ड ने इसके लिए एक गूगल फार्म भी उपलब्ध कराया है, जिसके माध्यम से सभी जोनों को अपना समेकित विवरण भेजना होगा। इसके बाद उसी डेटा की प्रमाणित हार्ड कापी 17 जुलाई 2026 तक रेलवे बोर्ड को भेजनी होगी।
रेलवे बोर्ड के प्रमुख कार्यकारी निदेशक (वेतन आयोग) संदीप पाल ने सभी जोन, उत्पादन इकाइयों और प्रशिक्षण संस्थानों को स्पष्ट किया है कि केवल जोनल रेलवे या उत्पादन इकाई स्तर से एक ही समेकित प्रविष्टि स्वीकार की जाएगी। डिवीजन या अधीनस्थ इकाइयों द्वारा अलग-अलग डेटा भेजने पर विचार नहीं किया जाएगा।
इस दिशा-निर्देश को अत्यंत आवश्यक श्रेणी में जारी किया गया है। रेलकर्मियों और कर्मचारी संगठनों का मानना है कि यह पहल भविष्य में जोखिम भत्ता, कठिनाई भत्ता तथा अन्य सेवा सुविधाओं के निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। ऑल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन (एआईआरएफ) के जनरल सेक्रेटरी शिव गोपाल मिश्र को उम्मीद है कि आठवां वेतन आयोग रेलवे के विभिन्न संवर्गों की वास्तविक कार्य परिस्थितियों और जोखिम को ध्यान में रखते हुए सकारात्मक सिफारिशें करेगा।
रेलकर्मी, सेना के जवान की तरह आंधी, बारिश, धूप और ठंड आदि विषम परिस्थितियों में जान जोखिम में डालकर 24 घंटे ट्रेनों का निर्बाध संचालन कर रहे हैं।
एआईआरएफ ने आठवें वेतन आयोग में बेसिक के साथ सभी तरह के एलाउंस का भी एरियर देने की मांग की है। साथ ही रेल मंत्रालय के समक्ष पांच यूनिट पर आयोग गठन का सुझाव प्रस्तुत किया है। अभी तक रेलकर्मियों को तीन यूनिट के आधार पर वेतन का निर्धारण होता रहा है।
