गोरखपुर, जागरण संवाददाता। विधानसभा चुनाव में दावेदारी करने वाले प्रत्याशियों के लिए प्रस्तावकों की संख्या निर्धारित हो गई है। मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों को जहां एक प्रस्तावक देना होगा वहीं निर्दल प्रत्याशियों को 10 प्रस्तावकों को साथ लाना होगा। प्रस्तावकों की संख्या कम होने पर उनका नामांकन वैध नहीं रह जाएगा।

मान्‍यता प्राप्‍त दलों के अलावा हर प्रत्‍याशी को माना जाएगा निर्दल

राष्ट्रीय दल के रूप में मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल एवं चुनाव वाले राज्य में मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों के अलावा शेष दलों के प्रत्याशियों को निर्दल के रूप में ही रखा जाता है। कई ऐसे दल होते हैं, जो पंजीकृत तो रहते हैं लेकिन उन्हें मान्यता नहीं मिलती है। ऐसे दल भी चुनाव में प्रत्याशी उतारते हैं। इन दलों के प्रत्याशियों को भी निर्दल ही माना जाएगा। नामांकन करने वाले नेता का नाम प्रदेश के किसी भी विधानसभा की मतदाता सूची में नाम होना चाहिए। वह कहीं से भी नामांकन कर सकता है लेकिन जिस विधानसभा क्षेत्र में नामांकन करेगा, उसके प्रस्तावकों का नाम उसी विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में होना चाहिए। प्रस्तावकों की यह व्यवस्था बहुत पहले से लागू है।

प्रत्‍याशियों की संख्‍या कम रखने के लिए बनाई गई व्‍यवस्‍था

इसके पीछे प्रत्याशियों की संख्या को सीमित करना है। प्रस्तावकों की संख्या होने के कारण केवल नाम के लिए नामांकन करने वाले हतोत्साहित होते हैं। उप जिला निर्वाचन अधिकारी राजेश कुमार सिंह ने बताया कि निर्दल प्रत्याशियों को 10 प्रस्तावकों के साथ नामांकन करना होता है। मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रत्याशी एक प्रस्तावक के साथ नामांकन दाखिल कर सकते हैं।

ड्यूटी से मुक्ति पर निर्णय लेगी तीन सदस्यीय टीम

विधानसभा चुनाव में मतदान कार्मिकों की ड्यूटी लगाई जा रही है। हर वर्ष कुछ मतदान कार्मिकों की ओर से ड्यूटी कटवाने के लिए आवेदन भी दिए जाते हैं। अभी तक आवेदन नहीं आ रहे हैं लेकिन प्रशासन ने इसके लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। कमेटी के अध्यक्ष मुख्य विकास अधिकारी होंगे।

Edited By: Navneet Prakash Tripathi