गोरखपुर, जेएनएन। अपर जिला जज पवन कुमार तिवारी के पास पहुंची इनकम टैक्स की नोटिस ने सरकारी महकमों की कार्यप्रणाली को कटघरे में ला दिया है। आयकर विभाग ने विशेष न्यायाधीश (एससी-एसटी) को सात साल पुराने उस मामले में तलब कर लिया, जिसका उनसे कोई वास्ता ही नहीं है। आहत न्यायाधीश ने इलाहाबाद हाईकोर्ट को इसकी जानकारी देते हुए संबंधित पर कार्रवाई की अपील की है।

यह था मामला

यह प्रकरण जमीन के उस वाद से जुड़ा है, जिस पर पवन कुमार तिवारी ने 2010 में बतौर लघुवाद न्यायाधीश फैसला सुनाया था। विक्रय करार का यह वाद वंदना सेवा संस्थान की जानकी मिश्रा बनाम रामवृक्ष आदि से संबंधित था। न्यायाधीश ने रामवृक्ष आदि को तीन माह के भीतर संस्था के पक्ष में बैनामा करने का आदेश दिया था। इस पर अमल नहीं हुआ तो 2012 में उन्होंने एक और फैसला सुनाया, जिसमें लिपिक निर्भय कुमार मिश्र को रजिस्ट्री करने के लिए अधिकृत किया गया।

रजिस्ट्री दस्तावेज के हर पन्ने पर विक्रेता की जगह न्यायाधीश की मुहर

बताते हैं कि निर्भय ने 30 मार्च 2012 को सब रजिस्ट्रार बांसगांव कार्यालय में रजिस्ट्री कर दी। रजिस्ट्री दस्तावेज के हर पन्ने पर विक्रेता की जगह न्यायाधीश की मुहर लगी थी, जबकि दस्तखत निर्भय मिश्र ने किए थे। रजिस्ट्री कार्यालय ने इस पर ध्यान नहीं दिया, जिस पर पवन कुमार तिवारी को विक्रेता मानते हुए आयकर ने तलब कर लिया। दो नवंबर को जारी इनकम टैक्स की नोटिस में न्यायाधीश को 2012-13 के विक्रय विलेख, पूंजीगत आय पर दिए गए कर के दस्तावेज, सभी बैंकों के स्टेटमेंट आदि के साथ बुलाया गया है।

न्‍यायाधीश ने कहा-आयकर का नोटिस मिला

इस संबंध में विशेष न्यायाधीश (एससी-एसटी) पवन कुमार तिवारी ने बताया कि आयकर का नोटिस मिला है, चूंकि भूमि के विक्रय संबंधित न्यायालय के निर्णय एवं न्यायालयीय अवमानना से संबंधित है, इसलिए प्रकरण को विधि संगत कार्रवाई हेतु माननीय उच्च न्यायालय को संदर्भित कर दिया गया है।

बोले इनकम टैक्स के डिप्टी कमिश्नर

इस बारे में इनकम टैक्स के डिप्टी कमिश्नर अजय कुमार का कहना है कि उन्हें नोटिस भेजी गई है। अपर जिला जज अपना इंफार्मेशन, जैसे परचेज का एमाउंट क्या है, डिटेल क्या है, आदि अपलोड करा दें। किस तारीख को रजिस्ट्री हुआ, कौन खरीदने वाला है, कौन बेंचने वाला, सब अपलोड कर दें। 

Posted By: Satish Shukla

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