गोरखपुर, जेएनएन। रोहिन नदी शनिवार की सुबह खतरे के निशान से एक मीटर नौ सेंटीमीटर ऊपर बह रही थी, जलस्तर में वृद्धि जारी है। इसी के साथ राप्ती एवं सरयू नदियों का जलस्तर भी लगातार बढ़ रहा है। राप्ती खतरे के निशान से करीब 70 सेंटीमीटर ही नीचे रह गई है। सिंचाई विभाग तटबंधों के सुदृढ़ीकरण को लेकर तमाम दावे कर रहा है लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है। रेन कट, रैट होल, बंधों की कटान देखकर ग्रामीणों में भय का माहौल है। कहीं-कहीं पुराने बड़े छेद हैं लेकिन इससे सिंचाई विभाग के अभियंता भी अनभिज्ञ हैं।

कटने शुरू हो गए बंधे

कहीं नदी तेजी से कटान करते हुए बांध की ओर बढ़ रही है और बांध को मजबूत करने के लिए लाए गए बोल्डर पिछले कई दिनों से पिचिंग का इंतजार कर रहे हैं। अभियंता अब कोविड की मजबूरियों का हवाला भले दे रहे हैं लेकिन स्थिति नियंत्रित होने के बाद भी उनकी ओर से तेज प्रयास देखने को नहीं मिला। आज की स्थिति को देखकर अगले कुछ दिनों बाद की भयावह स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। इधर कैंपियरगंज क्षेत्र के अलगटपुर का बग्घा टोला पानी से घिर गया है। ग्रामीणों को ऊंचे स्थान पर ले जाने के लिए तहसील प्रशासन ने एक नाव लगाई है। अबतक तीन नाव लगाई जा चुकी है।

अधिकांश बंधों पर हैं रेनकट

बांध की हकीकत जानने पहुंचे जागरण संवाददाता को कई स्थानों पर रेनकट दिखा। राप्ती नदी में पानी का स्तर बढ़ने से नेतवर पीपा पुल नदी के किनारे आ गया है, जिससे रास्ता बंद हो चुका है। रिगौली-बढ़या तटबंध के नेवास एवं बगलोटे के पास नदी कटान कर रही है। तटबंध कच्चा होने के कारण कटान तेजी से हो रहा है। नेवास टोले के पास बने ठोकर पर लगे बोल्डर धंस गये हैं जिससे तटबंध पर दबाव बढ़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि पिछले कई वर्षों से कोई मरम्मत कार्य नहीं हुआ है। यहां ठोस उपाय नहीं किए गए तो स्थिति भयावह हो सकती है।

नदी की धारा मोड़ने की उम्मीद में भूल गए पैचिंग का काम

कैंपियरगंज क्षेत्र करमैनी-पंघाटिया बंधे पर गायघाट के पास हो रहे कटान स्थल पर विभाग द्वारा बड़े-बडे बोल्डर गिराए गए हैं लेकिन पैचिंग का कार्य नहीं किया गया है। कोविड के कारण काम धीमा होने की बात कही गई थी लेकिन सहायक अभियंता ने 15 जून तक काम पूरा कर लेने का दावा किया था। राप्ती नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और नदी कटान करते हुए तेजी से बांध की ओर बढ़ रही है।

पैचिंग के लिए लाए बोल्डर बेकार पड़े हैं। विभाग के सहायक अभियंता बादल का कहना है कि गायघाट, कोनी, मिरिहिरिया और बहबोलिया के पास नदी की धारा मोड़ने का कार्य तेजी से हो रहा है, धारा मोड़ने के बाद दबाव कम हो जाएगा। पर, नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए ग्रामीणों को इस बात पर विश्वास नहीं हो पा रहा। घिसियावन निषाद, प्रमोद कुमार, श्यामनारायण यादव आदि ने बताया कि विभागीय उदासीनता के कारण यदि बांध कट गया तो एक दर्जन से अधिक गांव बाढ़ से तबाह हो जाएंगे।

अभिमन्यु सिंह ने बताया कि नदी का जलस्तर दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है, ऐसे में नदी की धारा मुड़ने के पहले यदि बांध कट गया तो जवाब कौन देगा। सहायक अभियंता अपने दावों को लेकर निश्चिंत हैं। उनका कहना है कि यदि पानी का दबाव बढ़ता है तो मौके पर पड़े बोल्डर से कटान को रोका जाएगा। पर, इस बात का जवाब नहीं कि अबतक यह काम क्यों नहीं हुआ?

ग्रामीणों ने तटबंध में देखा होल, हुए भयभीत

मझगांवा संवाददाता के अनुसार रकहट-कोठा बांध पर रकहट गांव के भैंसहा ढाले के पास शनिवार को ग्रामीणों ने बांध में बड़ा होल देखा तो वे बाढ़ की आशंका से भयभीत हो गए। नदी का जलस्तर बढ़ता जा रहा है, ऐसी स्थिति में तटबंध की जर्जर हालत से तबाही मच सकती है। माना जा रहा है कि यहां जानवरों ने मांद बना लिया था। उसमें 15 फीट का बांस डाला गया तो वह पूरी तरह से उसमें चला गया।

क्षेत्र के चंद्रमौल पांडेय, वेंकटेश्वर पांडेय, दीपक, राम प्रताप यादव व अभिषेक ने कहा कि बांध के किनारे झाड़ियों को साफ करने की जरूरत है। सफाई होने से इस तरह के और होल का पता चल सकता है। अवर अभियंता संजय सिंह ने बताया कि बांध पर सभी रेनकट भरे जा चुके हैं। इस होल की जानकारी नहीं थी, जल्द ही इसे भी भरवा दिया जाएगा।

कई साल बाद देखी ऐसी कटान

राप्ती नदी के डुमरिया बाबू बांध के सुरगहना गांव के सामने हो रही कटान से गांव के लोग भयभीत हैं। गांव के गबेदू, पंचम यादव, वीरेंद्र, महेंद्र, अजीत, बुद्धिराम, मनीष, सोनई, वंदन आदि ने बताया कि कई साल बाद ऐसी कटान देख रहे हैं। राप्ती नदी का जलस्तर बढ़ रहा है और तेजी से कटान हो रहा है। अवर अभियंता नवीन सिंह ने बताया कि पानी का बहाव इधर आया भी तो कोई खतरा नहीं है।

बाढ़ बचाव को लेकर उपाय किए जा रहे हैं। तटबंधों की निगरानी बढ़ाई गई है। कुछ स्थानों से शिकायत मिली थी, वहां मरम्मत कराई गई है। लगातार इस दिशा में काम किया जा रहा है। किसी को दिक्कत नहीं होने दी जाएगी। - इंद्रजीत सिंह, मुख्य विकास अधिकारी।

Edited By: Pradeep Srivastava