गोरखपुर, जागरण संवाददाता। ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की 52वीं पुण्यतिथि और महंत अवेद्यनाथ की सातवीं पुण्यतिथि पर आयोजित होने वाला समारोह इस बार 18 सितंबर से शुरू हो रहा है। सात दिन तक चलने वाले इस आयोजन का समापन 24 सितंबर को होगा। उद्घाटन और समापन दोनों कार्यक्रमों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी रहेगी। कोरोना प्रोटोकाल का पालन करने के क्रम में इस समारोह का आयोजन आनलाइन और आफलाइन दोनों मोड में किया जा रहा है। सभी कार्यक्रमों का सीधा प्रसारण गोरखनाथ मंदिर के फेसबुक पेज और यू-ट्यूब चैनल पर होगा। आयोजन को सफल बनाने के लिए मंदिर प्रबंधन जोर-शोर से जुटा हुआ है।

23 को महंत दिग्विजनाथ और 24 को महंत अवेद्यनाथ की प्रतिमा का होगा अनावरण

समारोह के अंतिम दो दिन में यानी 23 सितंबर को महंत दिग्विजयनाथ और 24 सितंबर को महंत अवेद्यनाथ की स्मृति में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया जाएगा। इन दोनों आयोजनों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मौजूद रहेंगे। इस बार के आयोजन में दो कार्यक्रम और जोड़े गए हैं। 23 सितंबर को रामगढ़ताल के सामने महंत दिग्विजय नाथ की प्रतिमा का अनावरण किया जाएगा। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केंद्रीय शिक्षा एवं कौशल विकास मंत्री धर्मेंद्र प्रधान होंगे। 24 सितंबर को महंत अवेद्यनाथ की प्रतिमा का लोकार्पण चौक बाजार महराजंगज के डिग्री कालेज में किया जाएगा, जिसके मुख्य अतिथि केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह होंगे। लोकार्पण कार्य दोपहर बाद संपन्न होगा। इससे पहले दाेनों महंतों को गोरखनाथ मंदिर के महंत दिग्विजय दिग्विजयनाथ स्मृति सभागार में श्रद्धांजलि दी जाएगी।

एक दिन पहले शुरू होगा श्रीराम कथा ज्ञानयज्ञ

पुण्यतिथि समारोह के दौरान गोरखनाथ मंदिर परिसर में हमेशा की तरह संगीतमय कथा ज्ञानयज्ञ का आयोजन किया जाएगा। कथा का विषय होगा 'श्रीराम-श्रीकृष्ण कथा का तात्विक विवेचन'। यह आयोजन मुख्य समारोह से एक दिन पूर्व यानी 17 सितंबर से शुरू होगा। समापन समापन समारोह से एक दिन पहले यानी 23 सितंबर तक होगा। ज्ञानयज्ञ के व्यासपीठ पर कथावाचक के रूप में स्वामी वासुदेवाचार्य विराजमान रहेंगे। कथा की शुरुआत 17 सितंबर को दोपहर 2.30 बजे शोभायात्रा के साथ होगी। शोभायात्रा गुरु श्रीनाथ जी के मंदिर से निकलकर कथा स्थल पर जाकर समाप्त होगी, जहां अखंड ज्योति की स्थापना के बाद कथाव्यास व्यासपीठ पर प्रतिष्ठित होंगे। कथा शाम तीन से छह बजे के बीच सुनाई जाएगी। अंतिम दिन हवन व भंडारे का आयोजन किया गया है।

छह फीट की दूरी पर लगाई जाएंगी कुर्सियां

कोरोना संक्रमण को देखते हुए फिजिकल डिस्टेंसिंग के पालन के क्रम में श्रद्धांजलि सभा और श्रीराम कथा में सीधे तौर पर सिर्फ सीमित लोग ही मौजूद रहेंगे। इसके लिए दिग्विजयनाथ स्मृति सभागार में छह-छह फीट की दूरी पर कुर्सियां लगाई जाएंगी। इन कुर्सियों पर बैठने वालों के नाम भी पहले से तय रहेंगे।। ऐसे में रामकथा में शामिल होने वाले यजमान और उनके परिवार वालों को ही कुर्सियों पर स्थान मिल पाएगा। बाकी इच्छुक लोग इन आयोजनों में आनलाइन माध्यम से ही जुड़ सकेंगे।

अखंड रामचरित मानस का होगा पाठ

पुण्यतिथि समारोह के दौरान श्रद्धांजलि सभा के पहले दिन से पूरे विधि-विधान से रामचरित मानस के अखंडपाठ की परंपरा है। अखंड पाठ का आयोजन दोनों ब्रह्मलीन महंतों के समाधि स्थल पर किया जाएगा। प्रबंधन के मुताबिक इस बार पाठ की शुरुआत 23 सितंबर की सुबह 10 बजे से होगी और जिसका समापन 24 सितंबर की सुबह 10 बजे होगा।

आयोजन में बतौर मुख्य अतिथि इन संतो-महंतों की रहेगी मौजूदगी

महंत सुरेशदास, अवधेश दास, शिवनाथ, स्वामी विद्या चैतन्य, गोपाल, श्रीधराचार्य, राघवाचार्य, राजू दास, शेरनाथ, धर्मदास, महंत सुरेश दास, स्वामी विद्या चैतन्य, स्वामी राघवाचार्य, महंत वृजमोहन दास, ब्रह्मचारी दासलाल, महंत बालक नाथ, स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती, राम बेलास वेदांती ।

18 से 22 सितंबर के बीच होगी संगोष्ठी

पुण्यतिथि समारोह के दौरान 18 से 22 सितंबर के बीच विभिन्न विषयों पर संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा। संगोष्ठी में बतौर वक्ता एम्स की निदेशक डा. सुरेखा किशोर, बीआरडी मेडिकल कालेज के एसोसिएट प्रोफेसर डा. राजकिशोर सिंह, गोरखपुर विश्वविद्यालय प्रो. हर्ष कुमार सिन्हा व प्रो. गोपाल प्रसाद, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी, डा. लालमणि त्रिपाठी मौजूद रहेंगे।

Edited By: Pradeep Srivastava