गोरखपुर, जागरण संवाददाता। आईएफएफडीसी के तीन केंद्रों पर डीएपी और यूरिया के आवंटन पर रोक लगा दी गई। जिला कृषि अधिकारी ने इफको को निर्देश जारी करते हुए जांच बैठा दी है। अक्टूबर से नवंबर माह तक इन तीनों केंद्रों पर किए गए आवंटन की फाइल को भी तलब किया है। यह कार्रवाई दैनिक जागरण में 29 नवंबर के अंक में 'अधिकारियों ने अपने चहतों में बांट दी 70 एमटी डीएपी' शीर्षक से छपी खबर के बाद की गई।

यह है मामला

रबी की बोआई के प्रमुख समय डीएपी की किल्लत से एक सप्ताह से अधिक समय तक किसान परेशान थे। उन्हें प्राइवेट की दुकानों से अधिक दाम पर डीएपी लेना पड़ रहा था। ऐसे में 25 नंवबर की भोर में जिले को मिली 2010 एमटी की रैक में डीएपी की 1070 एमटी रही। अधिकारियों ने इसका अलाटमेंट करते हुए 80 प्रतिशत यानी 985 टन सहकारी समितियों और पीसीएफ के लिए तो 20 प्रतिशत यानी 70 टन इफकों से संचालित केंद्रों के लिए दिया।

अधिकारियों ने मिलकर किया खेल

इसमें कृषि विभाग और इफकों के अधिकारियों ने मिलकर अपने चहेते तीन आईएफएफडीसी केंद्रों में ही 70 टन डीएपी का अलाटमेंट कर दिया। जब कि जिले में इसके 72 केंद्र संचालित हैं। अन्य 69 पर एनपीकेएस भेजा गया। इस मामले को लेकर दैनिक जागरण ने 29 नवंबर के अंक में प्रमुखता से उठाया। 'अधिकारियों ने अपने चहतों में बांट दी 70 एमटी डीएपी' शीर्षक से खबर छापकर अधिकारियों द्वारा किए गए गोलमाल को प्रमुखता से प्रकाशित किया।

कृषि अधिकारी ने तलब की आवंटन की फाइल

खबर का सज्ञान लेते हुए कृषि अधिकारी ने इफकों के अधिकारी को निर्देश जारी करते हुए चहेते तीन केंद्रों पर भेजी गई डीएपी व यूरिया के आवंटन की फाइल तलब की। साथ ही आगे से आने वाले रैक से इनकों डीएपी व यूरिया देने पर रोक लगा दी।

दो माह तक इन तीन केंद्रों को मिले 252 टन

जिला कृषि अधिकारी के अनुसार इन तीन केंद्रों को अक्टूबर और नवंबर माह में 252 टन डीएपी व अन्य का आवंटन किया गया है। इसमें से 25 नवंबर को एक साथ 70 टन डीएपी का आवंटन किया गया। अन्य 182 टन अक्टूबर से लेकर 24 नवंबर के बीच किया गया।

क्या कहते हैं अधिकारी

जिला कृषि अधिकारी देवेन्द्र प्रताप सिंह ने बताया कि आईएफएफडीसी के तीनों केंद्रों पर डीएपी व यूरिया के आवंटन पर रोक लगा दी गई है। इफको के अधिकाीर से दो माह में इन केंद्रों पर किए गए आवंटन की फाइल मांगी गई है। जांच के बाद आगे का निर्णय लिया जाएगा।

Edited By: Pragati Chand

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