गोरखपुर, जेएनएन। इसे खुद को स्वस्थ व निरोग रखने की मंशा कहें या आधुनिकता की रेस में बने रहने की चाहत, पूर्वांचल की महिलाओं में फिटनेस को लेकर ललक बढ़ती जा रही है। शहर के अलग-अलग इलाकों में संचालित हो रहे जिम में महिलाओं की बढ़ रही तादाद इस बदलाव की पुष्टि है। दरअसल कभी पुरुषों और मेट्रो शहरों की महिलाओं तक सीमित फिटनेस की चाहत अब छोटे शहरों की महिलाओं को भी लुभाने लगी है। कामकाजी हों या घरेलू, अब पूर्वांचल की ज्यादातर महिलाएं खुद के खानपान और स्वास्थ्य को लेकर सजग हो गई हैं। कुछ महिलाएं आसपास के जिम में जाकर अपनी फिटनेस के लिए पसीना बहा रही हैं तो कुछ ने अपने घर के एक कमरे को मिनी जिम बना रखा है। फिटनेस को लेकर जिम के प्रति आकर्षित होने वाली महिलाओं की फेहरिस्त दिनो-दिन बढ़ती जा रही है।

फिटनेस की चाह में जिम की राह

कामकाजी महिलाएं खुद को फिट व फाइन रखने के लिए जिम पहुंच रहीं हैं। वहीं, घरेलू महिलाओं का भी मानना है कि घर-गृहस्थी से बाहर फिटनेस की एक दुनिया है। जो हमें स्वास्थ्य व सौंदर्य के प्रति सजग करती है। जिम में चंद मिनटों के व्यायाम से पूरे दिन के लिए ऊर्जा मिल जाती है। ट्रेडमिल, अपराइट बाइसिकिल, एअर बाइक्स, क्रास ओवर जैसे जिम के उपकरणों के साथ एक-डेढ़ घंटा बिता कर महिलाएं खुद को निरोग व तरोताजा महसूस करती हैं। फिटनेस के प्रति ललक का ख्याल रखते हुए ही प्रशासन ने भी शहर के कई पार्कों में ओपेन जिम स्थापित किया है। जिसपर सुबह-शाम जोर-आजमाइश करती महिलाएं देखी जा सकती हैं।

इसलिए बढ़ रही जिम में भीड़

एकल परिवार के बढ़ते चलन से घरेलू कार्य काफी सिमट गए हैं। मिक्सी, वाशिंग मशीन, वैक्यूम क्लीनर जैसे आधुनिक यंत्रों के उपयोग ने महिलाओं की शारीरिक क्षमता को भी घटा दिया है। इन वजहों से शरीर में रोगों की आवक तेजी से बढ़ी है। रोगों से उबरने व फिट रहने के लिए जिम एक बड़ी उम्मीद के रूप में महिलाओं के सामने आया है।

जिम में महिलाओं के लिए मुकम्मल इंतजाम

जिम के प्रति महिलाओं के बढ़ते रुझान को देखते हुए जिम संचालकों ने भी उनके लिए विशेष इंतजाम करने शुरू कर दिए हैं। साड़ी, सूट या नकाब में आने वाली महिलाओं को व्यायाम में कोई दिक्कत न आए, इसके लिए कई जिम में उनके लिए चेंजिंग रूम बनाया गया है। बहुत सी महिलाएं घरेलू वस्त्रों में जिम पहुंचती हैं, ट्रैक सूट में व्यायाम करने के बाद फिर से घरेलू वस्त्र पहनकर जिम से निकलती हैं। इससे वह संस्कार निभाने के साथ खुद को फिट रखने का जतन भी कर पा रहीं हैं।

महिलाओं के भी चलते हैं कई बैच

कैंट थाना रोड पर मौजूद जिम की संचालक ऐश्वर्या पांडेय कहती हैं कि ढाई दशक पहले उनके पति परमात्मा पांडेय ने गोरखपुर में जिम की नींव डाली। उनके ना रहने के बाद छह साल से जिम का कार्यभार संभाल रही हैं। वह बताती हैं कि शुरू में केवल पुरुष के जिम में ही महिलाएं आती थीं लेकिन बढ़ती संख्या के कारण अब महिलाओं के भी कई बैच बनाने पड़े हैं। उन्होंने अपने यहां महिलाओं के व्यायाम के लिए विशेष इंतजाम कर रखा है। यहां महिलाओं को व्यायाम के दौरान सूट पहनना अनिवार्य होता है। ऐश्वर्या की चाहत है कि मेट्रो शहरों की तरह गोरखपुर की महिलाएं भी बॉडी बिल्डिंग में अपनी पहचान बनाएं।

खुद को बेहतर दिखाने की ललक में जिम पहुुंच रहीं महिलाएं

बशारतपुर में महिलाओं को ट्रेनिंग देने वाली चंचल शर्मा दिल्ली गईं और वहां से जिम ट्रेनर बनकर लौटीं। तीन साल से गोरखपुर में महिलाओं को फिटनेस के बारे में बता रही हैं। बकौल चंचल अब गोरखपुर की महिलाएं भी अपनी फिटनेस को लेकर काफी जागरूक हो गई हैं। डिलिवरी ऑपरेशन के बाद कई औरतों में मोटापा की शिकायत आती है। ऐसी महिलाओं की जिम में आने की संख्या ज्यादा है। इसके पीछे महिलाओं की मंशा खुद को बेहतर दिखाने की है।

क्‍या कहती हैं महिलाएं

कुसुम अग्रवाल खुद का बिजनेस संभालती है। काम के सिलसिले में बाहर निकलना पड़ता है। घरेलू जिम्मेदारी अलग से है। सारा दिन काम करते रहने से थकान होने लगती थी। बताती हैं कि बिटिया ने जिद करके जिम ज्वाइन करवा दिया। अब वजन तो पहले से कम हो ही गया है। दिन भर ऊर्जा भी बनी रहती है। निजी स्कूल में पढ़ा रहीं मंजुला शुक्ला पचास पार कर चुकी हैं। वो कहती हैं कि घर और बाहर दोनों का संतुलन बनाने में शाम तक शरीर जवाब देने लग जाता था। लोगों ने जिम जाने की सलाह दी। शुरू में थोड़ा अजीब लगता था पर अब तो जिम की आदत पड़ गई है। जिम जाते दो साल हो चुके हैं। पहले की अपेक्षा अधिक ताजगी महसूस होती है।

Posted By: Satish Shukla

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